सभी जैन मंदिरों सहित पपौरा जी, आहार जी, बंधा जी एवं नवागढ़ जी में होगी विशेष धर्म आराधना

टीकमगढ़। सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा दस लक्षण पर्युषण महापर्व के अंतर्गत आज 20 सितंबर को उत्तम सत्य धर्म श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर टीकमगढ़ शहर के सभी जैन मंदिरों के साथ-साथ अतिशय क्षेत्र पपौरा जी, आहार जी, बंधा जी एवं नवागढ़ जी में भी विशेष धार्मिक कार्यक्रम एवं धर्म आराधना की जाएगी।
धर्म प्रभावना समिति के अध्यक्ष नरेंद्र जनता ने जानकारी देते हुए बताया कि दस लक्षण पर्व का प्रत्येक दिन जैन समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उत्तम सत्य धर्म के दिन श्रद्धालु सत्य के वास्तविक स्वरूप को समझने और अपने जीवन में सत्य, सरलता एवं निष्कपटता को अपनाने का संकल्प लेते हैं।
उन्होंने बताया कि जैन दर्शन में सत्य को सर्वोच्च एवं मूल धर्मों में से एक माना गया है। केवल सही बात बोलना ही सत्य नहीं है, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धता भी सत्य धर्म का महत्वपूर्ण अंग है। मन में किसी के प्रति छल-कपट न रखना, यथार्थ को स्वीकार करना तथा उसी के अनुरूप आचरण करना ही उत्तम सत्य धर्म की भावना है।
जैन धर्म में सत्य का पालन अहिंसा के साथ जुड़ा हुआ है। ऐसा सत्य, जिससे किसी जीव को अनावश्यक कष्ट या हिंसा पहुंचे, जैन दर्शन में सत्य की भावना के अनुरूप नहीं माना जाता। इसलिए सत्य वही है जो हितकारी, संयमित और अहिंसात्मक हो।
नरेंद्र जनता ने बताया कि जैन धर्म के त्रिरत्न—सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान एवं सम्यक् चरित्र जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। वहीं पंच महाव्रत—अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य एवं अपरिग्रह जैन धर्म के प्रमुख आधार हैं।
उन्होंने कहा कि अनेकांतवाद भी जैन दर्शन की महत्वपूर्ण अवधारणा है, जो यह समझाता है कि सत्य और वास्तविकता के अनेक पहलू हो सकते हैं। इसलिए प्रत्येक विषय को व्यापक एवं निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझना चाहिए।
उत्तम सत्य धर्म के अवसर पर जैन समाज के पुरुष, महिलाएं एवं बच्चे मंदिरों में पहुंचकर अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, विधान, स्वाध्याय एवं धर्म आराधना में शामिल होंगे और अपने जीवन में सत्य, संयम एवं अहिंसा को अपनाने का संकल्प लेंगे।









