महरौनी, ललितपुर।

दशलक्षण महापर्व के तृतीय दिवस स्थानीय श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में उत्तम आर्जव धर्म श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर दिनभर धार्मिक अनुष्ठान एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
प्रातःकाल श्रद्धालुओं ने वेदी पर विराजमान तीर्थंकर भगवान का विधिवत अभिषेक कर विश्व शांति एवं जनकल्याण की मंगलकामना के साथ शांतिधारा संपन्न की। श्रावक-श्राविकाओं ने अष्टद्रव्य से उत्तम आर्जव धर्म का पूजन कर सामूहिक शांति विधान में अर्घ्य समर्पित किए। शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त करने वाले पुण्यार्जक परिवारों का मंदिर प्रबंध समिति की ओर से तिलक, माला एवं दुपट्टा पहनाकर सम्मान किया गया।
सायंकाल धर्मसभा में श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर से पधारीं विदुषी दिव्यांशी जैन एवं विदुषी अवनि जैन ने उत्तम आर्जव धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि मन, वचन और काय में सरलता रखना तथा छल-कपट एवं मायाचारी का त्याग करना ही उत्तम आर्जव धर्म है। सरलता से जीवन में सहजता और आत्मिक शांति का विकास होता है।
प्रवचन के बाद भगवान की संगीतमय महाआरती हुई। रात्रिकालीन सत्र में समाज के बच्चों एवं युवाओं ने ज्ञानवर्धक एवं मनोहारी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कार्यक्रम का आभार अंकित चौधरी एवं सामंत भायजी ने व्यक्त किया।









