अहंकार त्याग, विनम्रता अपनाने का संदेश—उत्तम मार्दव धर्म की आराधना

महरौनी के दोनों जिनालयों में दशलक्षण महापर्व के दूसरे दिन हुए धार्मिक आयोजन

 

महरौनी, ललितपुर।

दशलक्षण महापर्व के द्वितीय दिवस पर नगर के दोनों जिनालयों में श्रद्धालुओं ने भक्ति, तप, त्याग एवं धर्म आराधना के साथ उत्तम मार्दव धर्म का पालन किया। श्री अजितनाथ बड़ा जैन मंदिर में मुनिश्री विकौशल सागर जी महाराज के सानिध्य में जिनाभिषेक, शांतिधारा, पूजन एवं धर्मसभा का आयोजन हुआ।

धर्मसभा में मुनिश्री विकौशल सागर जी महाराज ने कहा कि मार्दव का अर्थ मान-कषाय का अभाव और विनम्रता का भाव है। मनुष्य को ज्ञान, धन, पद अथवा प्रतिष्ठा का अहंकार त्यागकर सरल एवं सहज जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए। दशलक्षण महापर्व आत्मशुद्धि और कषायों को कम करने की साधना का अवसर है।

वहीं श्री चंद्रप्रभु जिनालय में सांगानेर से आईं विदुषी दिव्याशी एवं विदुषी अवनि जैन ने श्रद्धालुओं को मार्दव धर्म का आध्यात्मिक महत्व बताया। उन्होंने कहा कि धन, रूप, ज्ञान, पद और प्रतिष्ठा का मद व्यक्ति में अहंकार उत्पन्न करता है। अहंकार का त्याग कर विनम्रता अपनाना ही उत्तम मार्दव धर्म की सार्थक आराधना है।

इस अवसर पर पाठशाला के शिक्षकों एवं बच्चों ने रानी चेलना के जीवन पर आधारित नाटक प्रस्तुत किया, जिसे श्रद्धालुओं ने सराहा। दोनों जिनालयों में अभिषेक, पूजन, धर्मसभा एवं प्रवचनों के चलते नगर का वातावरण धर्ममय बना रहा।

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रामजी तिवारी मड़ावरा

चीफ एडिटर – स्वराज भास्कर

रामजी तिवारी मड़ावरा एक अनुभवी और निष्पक्ष पत्रकार हैं, जो उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश की जमीनी खबरों को सटीकता और विश्वसनीयता के साथ प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्षों के अनुभव के साथ, उनका उद्देश्य समाज तक सच्ची, निष्पक्ष और प्रभावशाली खबरें पहुंचाना है।

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