टीकमगढ़। दिगंबर जैन समाज के दस लक्षण पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन 18 सितंबर को उत्तम आर्जव धर्म की आराधना श्रद्धा एवं भक्ति के साथ की जाएगी। इस अवसर पर टीकमगढ़ शहर के सभी जैन मंदिरों में प्रातः 6 बजे से श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा एवं विधान सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम प्रारंभ होंगे।

धर्म प्रभावना समिति के अध्यक्ष नरेंद्र जनता ने जानकारी देते हुए बताया कि उत्तम आर्जव धर्म के अवसर पर जैन समाज के पुरुष, महिलाएं एवं बच्चे धार्मिक वेशभूषा में प्रातःकाल मंदिर पहुंचकर धर्म आराधना करते हैं वहीं शाम के समय महिला मंडलों द्वारा सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

नरेंद्र जनता ने बताया कि दशलक्षण पर्व का तीसरा दिन उत्तम आर्जव धर्म को समर्पित है। आर्जव का अर्थ है—सरलता, सीधापन और निष्कपटता। जैन दर्शन में मनुष्य को छल-कपट, मायाचारी और दोहरे व्यवहार का त्याग कर मन, वचन और कर्म में एकरूपता लाने की प्रेरणा दी गई है।
मन में जो भाव हों, वही वचन में हों और वही व्यवहार में दिखाई दें—इसी सरल एवं निष्कपट आचरण को उत्तम आर्जव धर्म कहा गया है।
उन्होंने कहा कि मायाचारी मनुष्य के जीवन में छल-कपट और दिखावे को बढ़ाती है। उत्तम आर्जव धर्म हमें इन विकारों को छोड़कर सहज, सरल एवं पारदर्शी जीवन जीने की प्रेरणा देता है। सरल स्वभाव से आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है और व्यक्ति आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ता है।
दशलक्षण पर्व का यह पावन दिवस प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर झांकने, कपट एवं दिखावे का त्याग करने तथा मन, वचन और कर्म में समानता स्थापित करने का संदेश देता है।









