छत्रपति संभाजीनगर : पर्युषण महापर्व के द्वितीय दिवस, गुरुवार (17 सितंबर) को उत्तम मार्दव धर्म के पावन अवसर पर परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनम्रसागरजी महाराज ससंघ के मंगल सान्निध्य में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

नवाबपुरा स्थित श्री आचार्य गुप्तिनंदीजी सभागृह, गणधर वलय विधान निर्मित श्री हीराचंद कस्तूरचंद कासलीवाल (हीराकाका) प्रांगण में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इस अवसर पर सौधर्म इंद्र बनने का पुण्यार्जन श्री प्रवीणकुमारजी, डॉ. शैलेशकुमारजी एवं श्री मानकचंदजी चांदीवाल परिवार, ढाकलगांववाला तथा सौ. ललितादेवी, श्री अनिलकुमारजी, सौ. पूजाजी, श्री हर्षलजी एवं कु. मिहिका सेठी परिवार को प्राप्त हुआ।
वहीं, राजाबाजार स्थित जैन मंदिर में विजयादेवी, निलेश एवं नितीन सेठी परिवार को सौधर्म इंद्र बनने का पुण्यार्जन प्राप्त हुआ। उनके करकमलों से भगवान श्रीजी का अभिषेक किया गया। वहीं शांतिधारा का सौभाग्य राखीदेवी, किरण, निखिल एवं खुशबू गंगवाल परिवार को प्राप्त हुआ।
अहंकार जीवन की सबसे बड़ी समस्या, समर्पण ही समाधान : आचार्य विनम्रसागरजी
खंडेलवाल दिगंबर जैन पंचायत पार्श्वनाथ मंदिर, राजाबाजार की ओर से आयोजित पर्युषण पर्व के दौरान उत्तम मार्दव धर्म का महत्व बताते हुए आचार्य श्री विनम्रसागरजी गुरुदेव ने कहा कि अहंकार जीवन की सबसे बड़ी समस्या है और समर्पण ही उसका प्रभावी समाधान है। समर्पण जीवन को स्वर्ग के समान बना देता है। उत्तम मार्दव धर्म हमें अहंकार का त्याग करने तथा विनम्रता को अपनाने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि आत्मा और परमात्मा तथा भक्त और भगवान के बीच अहंकार का ही पर्दा होता है। जैसे ही यह पर्दा हटता है, भक्त का भगवान से साक्षात्कार हो जाता है। इस संसार में अहंकार किसी का भी स्थायी नहीं रहा। रावण, कंस और दुर्योधन इसके उदाहरण हैं। अहंकार के कारण ही उन्हें पतन का सामना करना पड़ा।

गुरुदेव ने कहा कि संपत्ति प्राप्त करना बड़ी बात नहीं है, बल्कि संपत्ति प्राप्त करने के बाद भी विनम्रता बनाए रखना बड़ी बात है। जीवन में ऊंचाई तक पहुंचना महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि उस ऊंचाई पर टिके रहना अधिक महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि साधना के दौरान संवेदनशीलता को कभी न भूलें। धन-दौलत से अधिक लोगों के दिल जीतना सीखें। जीवन में आने वाली कठिनाइयों से घबराएं नहीं, बल्कि धैर्य और संयम के साथ उनका सामना करें।
फूल की उपमा देते हुए गुरुदेव ने कहा कि दुनिया में परीक्षा हमेशा हीरे और सोने की होती है, कांच और कोयले की नहीं। इसलिए यदि जीवन में कठिनाइयां आती हैं तो घबराने के बजाय धैर्यपूर्वक उनसे उबरने का प्रयास करना चाहिए। याद रखें, परीक्षा हमेशा अच्छे और सच्चे व्यक्ति की ही ली जाती है।









