आज दैनिक अमृत संदेश भोपाल के संपादक राकेश गोयल ने सह परिवार पुष्पगिरी में आकर व्रत चक्रवर्ती पटटविभुषन अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया

औरंगाबाद पुष्पगिरी सोनकच्छ। परम पूज्य पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज के सानिध्य में अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज ससंघ पुष्पगिरी तीर्थ पर वर्षायोग हेतु विराजमान हैं उनके सानिध्य में वहां विभिन्न धार्मिक कार्योंकम संपन्न हो रहें हैं उसी श्रुंखला में आज उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि। भोजन का जीवन से गहरा सम्बन्ध है, जैसा भोजन होगा वैसा ही भजन होगा —
यदि भोजन शुद्ध नहीं है, तो भजन शुद्ध नहीं होगा।
जिसका खानपान शुद्ध नहीं है, उसका खानदान शुद्ध नहीं है।
जिसकी रोटी शुद्ध नहीं है, उसकी बेटी शुद्ध नहीं है।
जिसका आहार शुद्ध नहीं है, उसका व्यवहार शुद्ध नहीं है।
भोजन यह सोचकर करो, कि मैं नहीं खा रहा हूँ, अपितु मेरे भीतर जो परमात्मा मौजूद है — राम, कृष्ण, बुद्ध और महावीर, उसे मैं अर्घ्य चढ़ा रहा हूँ। जब तुम भोजन यह सोचकर करोगे, तो फिर कभी तुम माँस नहीं खा सकोगे, शराब नहीं पी सकोगे, जर्दा-तंबाकू नहीं खा सकोगे-?
क्या भगवान की पवित्र मूर्ति पर कभी तुम अपवित्र चीजों का भोग लगा सकते हो-? नहीं। क्योंकि ऐसा करना पाप है, ठीक इसी प्रकार भोजन से पूर्व यह सोच लो–कि मैं अपने भीतर विराजमान आत्मदेव को अर्घ्य चढा रहा हूँ। उनको भोग लगा रहा हूँ, तो फिर मैं समझता हूँ कि गलत पदार्थ व्यक्ति कभी नहीं खा सकता है। फिर शराब का सेवन नहीं कर सकता है, फिर बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू, गुटका, नहीं खा सकता है…!!! ऐसी जानकारी प्रचार प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद ने दी है









