ललितपुर। श्री सिद्धपीठ चंडी मंदिर धाम पर चल रहे सवा पंाच करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण आयोजन में मंगलवार को देश के कई हिस्सों से संतो का आगमन हुआ है। संतो द्वारा आयोजित संत सम्मेलन में भाग लिया गया। जहां पर विभिन्न मुद्दो पर उनके द्वारा अपनी बात रखी गयी। संत सम्मेन में चंडीपीठाधीश्वराचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी चन्देश्वर गिरी महाराज, पूज्य दण्डी स्वामी श्री राधारमण दास जी महाराज, महामण्डलेश्वर स्वामी आदित्यानांद जी महाराज, महामण्डलेश्वर रामेश्वरदास जी महाराज, महंत स्वामी हरीशपुरी जी महाराज, महंत स्वामी विवेक भारती जी महाराज, महंत विज्ञानांनद सरस्वती जी महाराज, कथा व्यास चन्द्रभूषण पाठक, जगदगुरू कृष्णगिरी जी महाराज, महंत सर्वानंद जी महाराज व गौरव भारती जी महाराज ने प्रवचन दिये।

तत्पश्चात सत्संग करते हुए अनंतविभूषित चंडीपीठाधीश्वराचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी चन्द्रेश्वर गिरि महाराज ने कहाकि धरा पर भगवान नारायण सर्वव्यापी हैं। उनके स्मरण से भक्त का कल्याण होता हैं। अजामिल ने नारायण का स्मरण करते मृत्यु के भय से मुक्ति मिल गई थीं। भक्त प्रहलाद की भक्ति से अभिभूत होकर स्वयं नारायण ने नृसिंह अवतार लिया और हिरण्यकश्यप का वध कर प्रहलाद की रक्षा की व धरा पर धर्म की स्थापना की।भक्त प्रहलाद ने भगवान की नारायण घकी नवधा भक्ति की।नवधा भक्ति के बारे में बताते हुए।उन्होंने कहाकि शास्त्रों व वेदों में भक्ति ने 9 प्रकार बताये गयें हैं जिसे नवधा भक्ति कहतें हैं। श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवनम, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य व आत्मनिवेदनम यह नवधा भक्ति कहलाती। जो भक्त इस प्रकार से भक्ति करता हैं।उसका जीवन सफल हो जाता हैं। संतों का का संग पाकर जड़-मूर्ख व्यक्ति भी धर्म व सत्य की राह पर आ जाता हैं। यथा पारस के स्पर्श से लोहा सोना बन जाता है। संत उन्हें कहा जाता है, जो व्यक्ति को परमात्मा का प्रकाश दिखा दें-उसे आत्मा की ओर उन्मुख कर दें, सद्गुरु से परिचय करा दें। संतों का हृदय नवनीत के समान होता है। जीवमात्र के भगवान उनके मन में दया होती है-अगाध प्रेम होता है। हम परमपूज्य गुरुदेव का स्मरण ऐसे संत के रूप में करते हैं, जिनके सान्निध्य में आकर अनेकों लोग बदलते चले गए, उनके दुख मिटते चले गए। सत्संग की महिमा अपरम्पार है एवं जिसे यह प्राप्त हो गया, वह नवधाभक्ति के प्रथम प्रसंग के माध्यम से भगवत्कृपा का पात्र बन गया। उन्होंने कहाकि भगवान ने श्रीमद्भागवत में कहा है-मैं वहाँ रहता हूँ जहाँ मेरे भक्त मेरी चर्चा करते हैं। भक्ति साधना में सबसे सुलभ मार्ग है-भगवान के लीला-प्रसंगों का चिंतन कर-गुणगान कर उनमें मन को लगा देना। श्रीरामचरितमानस की महाआरती कथा यजमान डॉ0 अनूप श्रीवास्तव व डा0 रानी श्रीवास्तव ने किया। इस दौरान प्रेस क्लब अध्यक्ष राजीव बबेले, विजय जैन कल्लू, ज्योति कल्पनीत लोधी, गिरीश खरे, बृजमोहन संज्ञा, अनूप मोदी, राहुल शुक्ला, विवेक जैन जिमी, अश्विनी पुरोहित, रमाकांत तिवारी, कृपा शंकर व्यास, शत्रुधन यादव, रामकृपाल गुप्ता, लक्ष्मीनारायण साहू, संतोष साहू, डॉ अनूप श्रीवास्तव, बाबा हीरानंद गिरी, सर्वेश्वर गिरी मनीष झां, दिनेश पाठक, मनीष कुमार दुबे आदि उपस्थित रहें।
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आज धूमधाम से निकलेगी भोले की विदाई यात्रा
सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण आयोजन के समापन के अवसर आज शहर में भोले की विदाई यात्रा निकलेगी। भोले की विदाई श्री सिद्धपीठ चंडी मंदिर धाम से प्रारंभ होकर वर्णी चौराहा, तुवन चौराहा, सावरकर चौक होते हुए सुम्मेरा तालाब पर समाप्त होगी। जहां भगवान की महाआरती की जायेगी।यात्रा देश के कई महामंडलेश्वर,साधु-संत भाग लेंगे।इसके अलावा कई झांकिया आर्कषण का केन्द्र होगी।
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मंगलवार को श्रत्रालुओं ने किया 30 लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण
सवां पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण में मंगलवार को श्रद्धालुओं द्वारा 30 लाख पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया गया। प्रातः कालीन बेला में श्री रूद्र महायज्ञ व पंचांग पूजन एवं वेदी हवन किया गया। इसके पश्चात पार्थिव शिवलिंग का महारूद्र अभिषेक मुख्य यजमान हरिशंकर साहू सहित अन्य सह यजमानों द्वारा किया
गया।








