सुनना ओर सहन करना सीखो…..अंतर्मना प्रसन्न सागर जी मोक्ष सप्तमी पर पुष्पगिरी तीर्थ के मूल नायक भगवान पारसनाथ स्वामी को निर्वाण लाडू समर्पित

बालिकाओं ने निर्जलउपवास कर संयम का पालन किया
सोनकच्छ ।
युगप्रधान गणाचार्य श्री 108 पुष्पदंत सागर जी व व्रतचक्रवर्ती पट्ट विभूषण अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज ससंघ सानिध्य में बुधवार को पुष्पगिरी तीर्थ पर मोक्ष सप्तमी पर्व भगवान पार्श्वनाथ स्वामी के मोक्ष (निर्वाण) कल्याणक के रूप में मनाई गई।  जैन धर्म में मोक्ष सप्तमी श्रावण शुक्ल सप्तमी तेईसवें तीर्थंकर पारसनाथ भगवान को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक तिथि है। इस दिन भगवान पार्श्वनाथ ने श्री सम्मेद शिखरजी पर्वत से कर्मों का नाश कर पूर्ण मुक्ति प्राप्त की थी। इस अवसर पर सुबह तीर्थ के मंदिर में भगवान के कलशाभिषेक शांतिधारा की गई। पारस नाथ स्तुति व निर्वाणकांड का पाठ पढ़ भगवान को निर्वाण लाडू समर्पित किया गया।
निर्जला उपवास
जैन समाज में विशेषकर बालिकाओ ने सामूहिक रूप से निर्जला उपवास और संयम का पालन किया। प्रवक्ता रोमिल जैन ने बताया कि समाज की बालिकाओं ने जिनालय में प्रभु पूजन कर संत सानिध्य का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर व्रतचक्रवर्ती पट्ट विभूषण अंतर्मना आचार्य श्री ने कहा कि भगवान पारसनाथ से दो गुण लेना चाहिए। पहला सुनना ओर दूसरा सहन करना। जब घर में कोई बड़ा हमसे कुछ कहे तो सुनने की आदत डालो और सहनशीलता दिखलाओ। जैसे पारसनाथ स्वामी पर घोर उपसर्ग आए पर उन्होंने सुना ओर सहन किया तो निर्वाण को प्राप्त कर भगवान बने। इस अवसर पर संघ श्रमण मुनि श्री नवपदम् सागर जी महाराज ने पारसनाथ भगवान के जीवन पर रोचक व आध्यात्मिक वर्णन किया। ऐसी जानकारी प्रचार प्रसार संयोजक रोमिल पाटणी सोनकच्छ नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद ने दी है

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रामजी तिवारी मड़ावरा

चीफ एडिटर – स्वराज भास्कर

रामजी तिवारी मड़ावरा एक अनुभवी और निष्पक्ष पत्रकार हैं, जो उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश की जमीनी खबरों को सटीकता और विश्वसनीयता के साथ प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्षों के अनुभव के साथ, उनका उद्देश्य समाज तक सच्ची, निष्पक्ष और प्रभावशाली खबरें पहुंचाना है।

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