औरंगाबाद पुष्पगिरी सोनकच्छ परम पूज्य पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज के सानिध्य में अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज ससंघ पुष्पगिरी में वर्षायोग हेतु विराजमान हैं उनके सानिध्य में वहां विभिन्न धार्मिक कार्योंकम संपन्न हो रहें सुबह ४ बजेसे भगवान की पुजन आराधना पक्षचात अभिषेक शातीधारा प्रवचन आदि उसी श्रुंखला में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आज अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि मैं देख रहा हूँ — आज इन्सान की रोजमर्रा की ज़िन्दगी को। अब आदमी – आदमी नहीं, उसका जीवन मशीन बन गया है। पुरा जीवन यन्त्र पर चल रहा है। आदमी मशीन का मुनीम बन गया है। हाथ में मोबाइल ना हो तो दिन खराब, गाड़ी ना हो तो शरीर खराब, रेस्टोरेंट ना जाये तो पेट खराब। मशीन-यन्त्र चलाते चलाते स्वयं यन्त्र बन गया है। अब आदमी का खाना, पीना, हँसना, रोना, बोलना, सोना, जागना, हगना-मूतना (लेट-बाथ), सब यन्त्र की तरह चल रहा है।
बड़े शहरों और महानगरों में मनुष्य यन्त्र बन गया है। इस यन्त्र बने मनुष्य को एक जीवन्त मन्त्र की सख्त जरूरत है। अगर समय रहते उसे यह जीवन मंत्र ना मिला, तो वह दिन दूर नहीं जब मनुष्य पागलों की तरह जीवन जीने को मजबूर हो जाएगा। भोग विलासिता और भौतिकता के संसाधनों का संग्रह करने में आदमी इस कदर हाथ धोकर पीछे पड़ा है, कि वह भूल ही गया है कि –
जीवन साधनों में नहीं, साधना में है।
राग में नहीं, त्याग में है।
भोग में नहीं, योग में है।

सुखी जीवन का मूल मंत्र यही है। साधनों में जीवन सुख नहीं है, साधना में जीवन सुख है। जिन घर परिवारों में जितनी सुख सुविधा, उतनी ज्यादा अशान्ति और परेशानी। इसलिए –
तू अपने आप को पहचान..
तू बेशक कोहिनूर है,
लेकिन सामने वाला तेरी कीमत अपनी औक़ात और अपनी हैसियत से लगायेगा…!!! ऐसी जानकारी प्रचार प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद ने दी है








