औरंगाबाद पुष्पगिरी सोनकच्छ। परम पूज्य पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज के सानिध्य में अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज ससंघ पुष्पगिरी तीर्थ पर वर्षायोग हेतु विराजमान हैं उनके सानिध्य में वहां विभिन्न धार्मिक कार्योंकम संपन्न हो रहें हैं उसी श्रुंखला में आज उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि। Delete जितनी तेजी से होता है, उतनी तेजी से Download नहीं होता। क्योंकि बनने में वक्त लगता है, मिटने में नहीं। सर्जन में समय लगता है, विसर्जन में नहीं। फिर वो चाहे कोई Application हो या रिश्ता।इसलिए —
स्वयं से परेशान होकर – झगड़ा ना करें।
जोश जोश में – स्वयं का नुकसान ना करें।
दूसरों पर दोषारोपण करने से – नकारात्मकता ही फैलेगी।
अनावश्यक कार्यों से – अपने आप को दूर रखो।
झुककर या हाथ जोड़कर ही – आप बेहतर इंसान बन सकते हैं।
एक बात मेरी याद रखना – बटर लगाने वाले के हाथ में, चाकू होता है।
सहयोग मांगने जाओ तो – सुना देते हैं लोग।
बात पता चल जाए तो – मजा लेते हैं लोग।
बताना नहीं अपने जख्म – किसी पड़ोसी को ए दोस्त।
अक्सर मौके का फायदा – उठा लेते हैं लोग।

ये सब समय का चक्र है, जो हमें बार-बार घुमाता रहता है। जैसे – आदमी भजिया, बड़ा, समोसा और कचोड़ी खाकर बीमार पड़ता है। फिर अस्पताल के पलंग पर बैठा-बैठा संतरा, मौसमी और सेब खाता है। उससे मिलने वाले सगे-सम्बन्धी भी अस्पताल में उसके लिए संतरा, मौसमी और सेब लाते हैं। फिर जब वह ठीक होकर अस्पताल से बाहर निकलता है, तो सबसे पहले सड़क किनारे खड़ा होकर फिर वही भजिया, समोसा, बड़ा और कचौड़ी खाने लगता है। यही तो जीवन का चक्र है– गलती हम करते हैं, सबक हमें मिलता है, कुछ समय सुधारते हैं…और फिर वही गलती दोहरा देते हैं।
इसी तरह —
आदमी पैसा कमाने के लिए दिन-रात मेहनत करता है। मेहनत करते-करते अपने शरीर को बिगाड़ लेता है। जब शरीर बिगड़ जाता है, तो उसे ठीक करने के लिए वही कमाया हुआ पैसा खर्च करता है।
पैसा कमाने के लिए स्वास्थ्य खोया, और स्वास्थ्य पाने के लिए पैसा खोया।
फिर भी इंसान नहीं समझता कि—
_जिस शरीर के लिए धन कमाया, उस शरीर को ही समय नहीं दिया।_
_जिस परिवार के लिए दौलत जुटाई, उसी परिवार के साथ बैठने का वक्त नहीं निकाला।_
_जिस सुख के लिए पूरी ज़िन्दगी दौड़ता रहा, वही सुख कहीं रास्ते में छूट गया।_
इसलिए जीवन को सिर्फ़ कमाने की मशीन मत बनाइए। थोड़ा कमाइए, थोड़ा बचाइए, थोड़ा बाँटिए, थोड़ा मुस्कुराइए, और सबसे जरूरी — अपने लिए, अपनों के लिए और अपने शरीर के लिए थोड़ा समय जरूर निकालिए।
क्योंकि—
_ज़िन्दगी दोबारा Download नहीं होती,_
_समय दोबारा Install नहीं होता,_
_और जो पल Delete हो गया, वह कभी Restore नहीं होता।_
इसलिए — जीवन को जीना सीखिए, सिर्फ़ गुजारना नहीं…!!! ऐसी जानकारी प्रचार प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद ने दी है








