रामजन्म और रावण दिग्विजय की लीला का भव्य मंचन

डिजिटल स्क्रीन बनी आकर्षण का केंद्र
सैकड़ों दर्शकों की मौजूदगी में कलाकारों ने जीवंत किए रामायण के प्रसंग
बानपुर – अपनी धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को संजोए कस्बा बानपुर की ऐतिहासिक श्रीरामलीला में दूसरे दिन भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्री रामलीला मंडल के तत्वावधान में आयोजित श्रीरामलीला महोत्सव में भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव और रावण दिग्विजय की लीला का भव्य मंचन किया गया। रामजन्म के प्रसंग में जैसे ही मंच से ‘भय प्रकट कृपाला दीन दयाला, कौसल्या हितकारी…’ की भक्तिमय चौपाइयां गूंज उठीं, पूरा रामलीला परिसर भक्तिरस में सराबोर हो गया। जय श्रीराम के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने प्रभु के प्राकट्य का उत्सव मनाया। लीला का आनंद लेने के लिए सैकड़ों दर्शकों की भीड़ उमड़ी और देर तक पूरा वातावरण राममय बना रहा।
रामजन्म के साथ रावण दिग्विजय का शानदार मंचन
श्रीरामलीला के दूसरे दिन भगवान श्रीराम के जन्म की लीला के साथ रावण दिग्विजय के प्रसंग को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय और संवादों के माध्यम से रामायण के पौराणिक प्रसंगों को मंच पर जीवंत कर दिया। पात्रों की भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। नगर के अलावा आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं में भी रामलीला को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया।
रामजन्म की लीला ने जहां श्रद्धालुओं को भक्ति और उल्लास से भर दिया, वहीं रावण दिग्विजय के मंचन ने दर्शकों के सामने रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों की रोचक झलक प्रस्तुत की। पारंपरिक संवाद, पात्रों की वेशभूषा और प्रभावशाली अभिनय ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया।
डिजिटल स्क्रीन पर सजी रामकथा, आधुनिक तकनीक ने बढ़ाया आकर्षण
इस वर्ष श्रीरामलीला के महोत्सव में डिजिटल स्क्रीन दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण बनी हुई है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से मंचन के दृश्यों को प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे दर्शकों को लीला के प्रसंगों को समझने और उनसे जुड़ने में सुविधा मिल रही है।
पारंपरिक रामलीला के साथ डिजिटल तकनीक का यह समन्वय आयोजन को नया स्वरूप दे रहा है। मंच पर कलाकारों के जीवंत अभिनय और स्क्रीन पर प्रदर्शित दृश्यों ने रामलीला के अनुभव को और रोचक बना दिया। दर्शकों के बीच डिजिटल स्क्रीन को लेकर विशेष उत्सुकता देखने को मिली।
कलाकारों ने निभाए विभिन्न पात्र, अभिनय से जीता दर्शकों का मन
रामजन्म एवं रावण दिग्विजय की लीला में कलाकारों ने विभिन्न पात्रों का अभिनय कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। भगवान विष्णु की भूमिका यश ने, जबकि रावण की भूमिका मनोज पुष्पकार ने निभाई। कुंभकर्ण के पात्र में नृपेंद्र सिंह और मेघनाथ की भूमिका में निशांत सिंह नजर आए। विभीषण की भूमिका में भी कलाकार ने अपनी सहभागिता निभाई।
राजा दशरथ की भूमिका अमरकांत ने, जबकि सुमंत का पात्र दयाशंकर सोनी ने निभाया। कैकेयी के रूप में अंकित, कौशल्या के रूप में तन्मय, सुमित्रा के रूप में कार्तिक और ब्रह्मा की भूमिका में बिज्जन सोनी ने अभिनय किया। वहीं सैनिक की भूमिका बेटू सहित अन्य कलाकारों ने निभाई। साथ ही साथ
सभी कलाकारों ने अपने-अपने पात्रों के अनुरूप अभिनय कर मंचन को प्रभावशाली बनाया। उनके अभिनय और संवाद अदायगी ने रामलीला के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को दर्शकों के सामने सजीव रूप में प्रस्तुत किया।
अतिथियों की उपस्थिति ने बढ़ाई कार्यक्रम की गरिमा
रामलीला महोत्सव के दूसरे दिन अनेक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही। इनमें मनमोहन रैकवार, जित्तू बाल्मीकि, केशव वंशकार, आकाश सोनी, रामसहाय साहू, आशीष नामदेव, रज्जन सिंह गौर, देवेंद्र झा, अशरफ खान, सौरभ यादव, बलराम यादव, अतीक खान अत्तु, छक्की अहिरवार, अरविंद कुशवाहा, राजकुमार सोलंकी, रामनाथ अहिरवार, लालाराम अहिरवार, इंद्र कुमार सिंघई, भगवान सिंह यादव एवं इबरार खां सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे।
अतिथियों ने रामलीला के मंचन का आनंद लिया तथा बानपुर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की। रामलीला के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और भगवान श्रीराम के आदर्शों से परिचित कराने के महत्व पर भी जोर दिया गया।
आयोजन की सफलता में सहयोगियों का अहम योगदान
श्री रामलीला मंडल के तत्वावधान में आयोजित महोत्सव को सफल बनाने में मंडल के इन सहयोगियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अतुल रावत, ध्रुवपाल सिंह, राकेश नामदेव, रानू राजा, पियूष नामदेव, अंकित विश्वकर्मा एवं महेंद्र यादव सहित अन्य सहयोगियों ने आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग किया।
कार्यक्रम के अंत में श्रीरामलीला मण्डल अध्यक्ष प्रदीप दीक्षित ने अतिथियों, कलाकारों, सहयोगियों और उपस्थित दर्शकों के साथ – साथ मीडियाकर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल एवं सुन्दर संचालन सहावेंद्र प्रताप सिंह गहरवार ने किया।
सौहार्द, आस्था और संस्कृति और आपसी सद्भाव का प्रतीक है बानपुर की रामलीला
बानपुर की श्रीरामलीला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि नगर की सांस्कृतिक पहचान और पीढ़ियों से चली आ रही आपसी सौहार्द की परंपरा का भी प्रतीक है। वर्षों से आयोजित हो रही इस रामलीला के माध्यम से रामायण के प्रसंगों का मंचन कर समाज को सत्य, धर्म, मर्यादा और सदाचार का संदेश दिया जाता है।
पारंपरिक मंचन, कलाकारों की मेहनत, श्रद्धालुओं की सहभागिता और आधुनिक डिजिटल तकनीक का संगम बानपुर के श्रीरामलीला महोत्सव को विशिष्ट बना रहा है। दूसरे दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव और रावण दिग्विजय की लीला ने श्रद्धालुओं की आस्था को नई ऊर्जा दी। रामभक्ति के जयकारों के बीच संपन्न हुआ आयोजन नगरवासियों के लिए आस्था, उल्लास और सांस्कृतिक गौरव का यादगार अवसर बना। इस अवसर पर विद्युत विभाग और बानपुर पुलिस का सहयोग सराहनीय रहा ।








