औरंगाबाद पुष्पगिरी तीर्थ सोनकच्छ परम पूज्य पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज के सानिध्य में अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज ससंघ पुष्पगिरी तीर्थ पर वर्षायोग हेतु विराजमान हैं उनके सानिध्य में वहां विभिन्न धार्मिक कार्योंकम संपन्न हो रहें हैं उसी श्रुंखला में वहां अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज की 29सितंबर से मौन साधना शुरू हुई है आज एकांतवास के दरम्यान उन्होंने अपने लिखित संदेश में कहा कि इसलिए आज कुछ लोग जीवन को बोझ की तरह, भार की तरह ढो रहे हैं। जिस जीवन में आनंद, प्रेम महोत्सव था, उस जीवन में मातम सा छा गया है। जहाँ फूल खिलने थे, वहाँ कांटे चुभ रहे हैं,, जहाँ दीप जलने थे, वहाँ दिल जल रहे हैं। लेकिन कसूर किसका है-? महावीर, कृष्ण, राम और बुद्ध जीवन को सार्थक कर सकते हैं, तो हम क्यों नहीं-?

जन्म जीवन नहीं बल्कि जीवन को जानने – पाने – खोने का एक अवसर है। मौत तुम्हारे एक अवसर से चुकने का इन्तजार कर रही है। इसलिए आज के आदमी को जीवन व्यर्थ लगता है। बात बात में – मैं क्या करूं-? कैसे जीयूं-? किसी भी कार्य में सफलता ही नहीं मिलती-?
अरे भाई! आप अपने दिन के रुटीन को देखो, तो पाओगे सिर्फ और सिर्फ सारी भाग दौड़ श्री और स्त्री के लिये है। आप इतिहास उठा कर देखो-? आज तक एक भी पुरुष और महापुरुष श्री – स्त्री से तृप्त नहीं हो पाये। जो इनसे तृप्त हुये, तो महापुरुष या सन्यासी बाबा बन गये। संसार के 33 करोड़ देवी देवताओं को पूजना आसान है लेकिन “श्री – स्त्री” को पाकर खुश रहना और खुश रखना ऐसा ही है जैसे शेर की मूछ के बाल को ताबीज में भरकर पहनना…!!! ऐसी जानकारी प्रचार प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद ने दी है









