*कुलपति प्रो. आशु रानी ने विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों को एक साथ लेकर मल्टीडिसिप्लिनरी टीम बनाने के लिए किया प्रोत्साहित*

*एक वर्ष से भी कम समय में फाउंडेशन द्वारा 26 स्टार्टअप्स का किया जा चुका है इनक्यूबेशन: निदेशक प्रो. शरद चंद्र उपाध्याय*
*AI से साइबर सुरक्षा तक, छात्रों ने पेश किए नवाचार के नए मॉडल; पांच स्टार्टअप्स चयनित*
*स्टार्टअप आइडियाज से समाधान तक: Seva First Innovation Challenge में छात्रों ने दिखाई उद्यमिता की क्षमता*
*विश्वविद्यालय के मंच पर गूंजे युवा नवाचार, छात्रों ने प्रस्तुत किए तकनीक आधारित स्टार्टअप समाधान*
*“स्थानीय समस्याओं से निकले स्टार्टअप समाधान, Seva First Innovation Challenge में छात्रों ने दिखाई नवाचार क्षमता”*
*आगरा, 29 सितंबर 2026।* डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति *प्रो. आशु रानी* ने बताया कि विवेकानंद इनक्यूबेशन फाउंडेशन विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित Section 8 Non-Profit Company है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को स्टार्टअप एवं उद्यमिता के क्षेत्र में मजबूत आधार और संस्थागत मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें किसी मौजूदा विचार या प्रतियोगिता से घबराने की आवश्यकता नहीं है। दुनिया में उपलब्ध विचारों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप ढालकर स्वास्थ्य, पर्यटन, अपशिष्ट प्रबंधन सहित विभिन्न क्षेत्रों में नए समाधान विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों को एक साथ लेकर मल्टीडिसिप्लिनरी टीम बनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
कुलपति द्वारा डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के विवेकानंद इनक्यूबेशन फाउंडेशन (VIF) द्वारा सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित जिला स्तरीय *Seva First Innovation Challenge एवं Student Startup Pitch and Incubation Showcase* में प्रतिभाग किया गया। इसमें विभिन्न महाविद्यालयों एवं संस्थानों के विद्यार्थियों ने अपने अभिनव स्टार्टअप आइडिया और तकनीकी समाधान प्रस्तुत किए।
कुलपति ने बताया कि VIF द्वारा विद्यार्थियों को चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) एवं कंपनी सेक्रेटरी (CS) की निःशुल्क सहायता, कानूनी अनुपालन संबंधी सहयोग तथा ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से निरंतर परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्टार्टअप की वास्तविक शक्ति केवल विचार में नहीं, बल्कि उस विचार के प्रभावी क्रियान्वयन में होती है और VIF विद्यार्थियों को विचार से लेकर उसके व्यावहारिक क्रियान्वयन तक आवश्यक सहयोग प्रदान कर रहा है।

कार्यक्रम में विवेकानंद इनक्यूबेशन फाउंडेशन की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए VIF के निदेशक *प्रो. शरद चंद्र उपाध्याय* ने बताया कि एक वर्ष से भी कम समय में फाउंडेशन द्वारा 26 स्टार्टअप्स का इनक्यूबेशन किया जा चुका है, जिनमें 20 स्टार्टअप्स विद्यार्थियों द्वारा संचालित हैं। उन्होंने बताया कि दिसंबर तक इनक्यूबेटेड स्टार्टअप्स की संख्या 40 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट आधारित संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए पढ़ाई के साथ-साथ उद्यमिता और रोजगार सृजन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वास्थ्य, पर्यावरण, साइबर सुरक्षा, शिक्षा, कृषि, सरकारी टेंडर, अपशिष्ट प्रबंधन एवं सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों से जुड़े व्यावहारिक और सामाजिक रूप से उपयोगी समाधान प्रदर्शित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में नवाचार, उद्यमिता और समस्या-समाधान की भावना को प्रोत्साहित करने के साथ उन्हें अपने विचारों को स्टार्टअप के रूप में विकसित करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन एवं इनक्यूबेशन सहयोग उपलब्ध कराना था।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने विभिन्न क्षेत्रों में समाधान आधारित स्टार्टअप प्रस्तुत किए। डॉ. एमपीएस कॉलेज, आगरा की स्नेहा एवं टीम ने *“Temple to Green”* स्टार्टअप के माध्यम से मंदिरों एवं घरों से निकलने वाले फूलों और जैविक कचरे का उपयोग कर सीड बॉल्स एवं सीड शीट जैसे पर्यावरण अनुकूल उत्पाद तैयार करने की योजना प्रस्तुत की। प्रियांशु मिश्रा ने *“Tender Sathi”* के माध्यम से सरकारी टेंडरों में एमएसएमई की भागीदारी को आसान बनाने का समाधान प्रस्तुत किया। एआई आधारित यह प्लेटफॉर्म कंपनी के टर्नओवर, पूर्व अनुभव, जीएसटी एवं अन्य पात्रता मानकों के आधार पर उपयुक्त टेंडरों की पहचान करने में सहायता करने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है।
दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट की खुशी अग्रवाल ने वरिष्ठ नागरिकों को साइबर एवं वित्तीय धोखाधड़ी से बचाने के लिए *“Suraksha”* एप का विचार प्रस्तुत किया। प्रस्तावित एप में खतरे की स्थिति को सरल संकेतों के माध्यम से प्रदर्शित करने, स्थानीय भाषाओं में वॉयस कम्युनिकेशन तथा पैनिक बटन के माध्यम से परिवार के सदस्यों को तत्काल सूचना भेजने जैसी सुविधाएं शामिल हैं। सेंट जॉन्स कॉलेज, आगरा के कृष्णा शुक्ला ने जीरो-वेस्ट फैशन ब्रांड का विचार प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य फास्ट फैशन से उत्पन्न कचरे को कम करना और मांग के अनुसार उत्पादन को बढ़ावा देना है। VIF द्वारा इस उद्यम को आगे बढ़ाने तथा इसे एकल स्वामित्व से Limited Liability Partnership (LLP) में परिवर्तित करने में सहयोग किया जा रहा है।
अनन्या ने “Vouch – Health & Ingredient Prediction App” प्रस्तुत किया, जो पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में मौजूद रसायनों एवं प्रिजर्वेटिव्स के प्रति उपभोक्ताओं को जागरूक करने पर केंद्रित है। प्रस्तुति के अनुसार यह स्टार्टअप Startup UP के अंतर्गत LLP के रूप में पंजीकृत है, इसका एप विकसित किया जा चुका है तथा ₹2 लाख प्रतिमाह के क्लाइंट कॉन्ट्रैक्ट की जानकारी भी साझा की गई। Government Degree College, Agra की समृद्धि ने “Kora Referral System” प्रस्तुत किया, जो जिला अस्पतालों और बड़े चिकित्सा संस्थानों के बीच मरीजों के रेफरल संबंधी डेटा को व्यवस्थित करने पर केंद्रित है। इसके माध्यम से मरीज के उपचार, स्वास्थ्य इतिहास एवं रेफरल से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

BD Jain Girls PG College की मान्या गोयल ने “Shiksha Setu” के माध्यम से विद्यार्थियों को एआई-सक्षम बनाने और पारंपरिक शिक्षा एवं रोजगारपरक कौशल के बीच की दूरी को कम करने का विचार प्रस्तुत किया। इसमें प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, जानकारी के सत्यापन और वास्तविक परियोजनाओं पर कार्य करने जैसे कौशलों पर जोर दिया गया। Baikunthi Devi Kanya Mahavidyalaya की अंशु कुमारी ने “Eco Crime Lab” नामक पर्यावरणीय फॉरेंसिक किट प्रस्तुत की, जिसमें टेस्ट ट्यूब, फिल्टर पेपर, पीएच स्ट्रिप्स एवं ग्लव्स जैसी सामग्री के माध्यम से विद्यार्थियों को मिट्टी, पानी एवं वायु प्रदूषण की जांच का व्यावहारिक अनुभव देने का प्रयास किया जाएगा।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के बीसीए पांचवें सेमेस्टर के छात्र तन्मय शर्मा ने “Cyberyoddha Tech” के माध्यम से साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कार्यरत अपने उद्यम की जानकारी दी। प्रस्तुति के अनुसार इसके अंतर्गत वेब पेनेट्रेशन टेस्टिंग, डिजिटल फॉरेंसिक्स एवं थ्रेट इंटेलिजेंस जैसी सेवाएं विश्वविद्यालयों, पुलिस साइबर सेल एवं व्यावसायिक संस्थानों को प्रदान की जा रही हैं। एआई आधारित साइबर सुरक्षा लर्निंग पोर्टल तथा संदिग्ध PDF/APK फाइलों की जांच के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी संचालित किया जा रहा है। प्रस्तुति में वर्तमान राजस्व लगभग ₹2–3 लाख प्रतिमाह बताया गया।
कार्यक्रम में एक दिव्यांग प्रथम वर्ष की छात्रा द्वारा विकसित कार्यशील एप का भी प्रदर्शन किया गया। छात्रा ने अपने सहपाठी के सहयोग से स्पीच एवं हियरिंग संबंधी चुनौतियों के बावजूद तकनीकी समाधान विकसित किया। इस प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि सहयोग, तकनीक और दृढ़ संकल्प के माध्यम से विभिन्न चुनौतियों के बावजूद नवाचार और तकनीकी समाधान विकसित किए जा सकते हैं।
जिला स्तरीय *Seva First Innovation Challenge* में प्रस्तुत नवाचारों में से निर्णायक मंडल द्वारा पांच छात्र स्टार्टअप एवं नवाचारों का चयन किया गया। इनमें University Computer Centre, Dr. Bhimrao Ambedkar University के *Divyan Bhadauriya* के “AI Signsetu” को प्रथम, इसी संस्थान की *Ishita Gaur* के “Dekh ke lo” को द्वितीय तथा Dayalbagh Educational Institute, Agra के *Sambhav Satsangi* के “Yoghar” को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। Dr. MPS College, Agra के *Divya Mitre एवं Piyush Agarwal* के “Divya Mitre” को चतुर्थ तथा इसी कॉलेज के *Kunal Bansal* के “Temple to Green” को पंचम स्थान के लिए चयनित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों एवं शिक्षाविदों ने भी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। प्रो. एस.एल. शर्मा, पूर्व प्रोफेसर, आईआईटी खड़गपुर एवं आगरा विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र, ने विश्वविद्यालय की प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों द्वारा स्थानीय, प्रदेश एवं राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान देने की क्षमता को रेखांकित किया। केआर कॉलेज, मथुरा के प्राचार्य *प्रो. प्रवीण अग्रवाल* ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं ऑटोमेशन नियमित कार्यों और गणनाओं को तेजी से कर सकते हैं, लेकिन मानवीय कल्पनाशीलता, नवाचार एवं रचनात्मक समस्या समाधान का महत्व बना रहेगा।
सेंट जॉन्स कॉलेज, आगरा के प्राचार्य *प्रो. एस.पी. सिंह* ने कहा कि आधुनिक तकनीक को समुदाय आधारित व्यावहारिक ज्ञान के साथ जोड़कर टिकाऊ सूक्ष्म उद्यम विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यार्थियों को व्यावहारिक एवं रोजगारपरक शिक्षा से जोड़ने पर बल दिया। दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट की इंचार्ज, इनक्यूबेशन सेल, *प्रो. सुश्मिता श्रीवास्तव* ने कहा कि पिछले एक दशक में विद्यार्थियों की सोच में महत्वपूर्ण बदलाव आया है और अब बड़ी संख्या में विद्यार्थी पारंपरिक रोजगार की बजाय स्वयं का उद्यम शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत विभिन्न स्टार्टअप आइडियाज ने यह प्रदर्शित किया कि युवा नवप्रवर्तक स्थानीय समस्याओं को पहचानकर तकनीक, नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से व्यावहारिक एवं सामाजिक रूप से उपयोगी समाधान विकसित कर रहे हैं। जिला स्तरीय Seva First Innovation Challenge ने विद्यार्थियों को अपने विचारों को मंच प्रदान करने के साथ-साथ विशेषज्ञों एवं इनक्यूबेशन तंत्र से जुड़ने का अवसर उपलब्ध कराया। कार्यक्रम में *डॉ. राजेश लवानिया, डॉ. प्रवीन कुमार, हिमांशु, योगेश तोमर, डॉ. प्रज्ञा काबरा, डॉ. के.के. पचौरी, डॉ. मयंक प्रताप सिंह, डॉ. रेखा शर्मा, ऐबरन सिंह, मनीष कुमार सहित विभिन्न संस्थानों के शिक्षक, विशेषज्ञ एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।








