*उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना के साथ हुआ दस लक्षण महापर्व का समापन; श्रद्धालुओं ने चढ़ाया निर्वाण लड्डू*
*भागलपुर / नाथनगर:*
*विश्व प्रसिद्ध जैन तीर्थ श्री चंपापुर दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र, नाथनगर (भागलपुर) में दिगंबर जैन धर्म के सबसे पावन ‘दशलक्षण महापर्व’ के अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म, अनंत चतुर्दशी तथा १२वें तीर्थंकर 1008 भगवान वासुपूज्य जी का मोक्ष कल्याणक पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं धूमधाम के साथ संपन्न हुआ।*
*दस दिवसीय पर्वराज दशलक्षण के समापन अवसर पर आज सिद्ध क्षेत्र परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। ‘उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म’ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए जैन आचार्यों के संदेश को दोहराया गया कि अपनी आत्मा (ब्रह्म) में लीन होना और समस्त वासनाओं पर विजय प्राप्त करना ही सच्चा ब्रह्मचर्य है।*
*कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण:*
*अभिषेक, शांतिधारा व निर्वाण लड्डू समर्पण: चंपापुर तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी की केवल ज्ञान एवं मोक्ष स्थली (पंच कल्याणक भूमि) होने के कारण यहाँ का विशेष महत्व है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान वासुपूज्य जी की प्रतिमा का भव्य महा मस्तकाभिषेक व शांतिधारा की। इसके पश्चात भक्तिभाव पूर्वक निर्वाण लड्डू समर्पित किया गया।*
*अनंत सूत्र व दीप प्रज्ज्वलन:अनंत चतुर्दशी के उपलक्ष्य में जैन मंदिरों में चौदह गांठ का अनंत सूत्र बांधकर जनकल्याण व रक्षा की प्रार्थना की गई। संध्या काल में महाआरती एवं भव्य दीप प्रज्ज्वलन का आयोजन हुआ।*
*भजन संध्या से मंत्रमुग्ध हुए श्रद्धालु: कार्यक्रम के दौरान सभी साधर्मी बंधुओं ने अपनी मधुर आवाज में एक से बढ़कर एक जैन भजनों की प्रस्तुति दी,जिससे संपूर्ण प्रांगण भक्तिमय माहौल में डूब गया।*
*तपस्वियों की अनुमोदन: श्री बंगाल बिहार उड़ीसा तीर्थ क्षेत्र कमेटी कोलकाता के सदस्य सुमित बड़जात्या ने दशलक्षण पर्व के दौरान निर्जला व कठिन उपवास रखने वाले सभी व्रतधारी तपस्वियों की तपस्या की सराहना (अनुमोदन) की और सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।*
*देशवासियों को अनंत चतुर्दशी की शुभकामनाएं:*
*स्थानीय जैन समाज एवं श्री बंगाल बिहार उड़ीसा तीर्थ क्षेत्र कमेटी कोलकाता के समस्त पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने इस पावन अवसर पर पूरे देशवासियों व जैन समाज को अनंत चतुर्दशी और दशलक्षण महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई संदेश प्रेषित किया।*
*कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने स्वाध्याय, जाप एवं ध्यान लगाकर अपने जीवन में ब्रह्मचर्य और आत्म-संयम धारण करने का संकल्प लिया*








