फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में बच्चों ने जैन सम्राटों के गौरवमयी इतिहास को किया याद।

तालबेहट(ललितपुर) सिद्ध क्षेत्र पावागिरि सहित कसबे के दोनों जैन मंदिरों में दशलक्षण महापर्व में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। कसबे के पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में पं. संतोष कुमार जैन शास्त्री अमृत एवं वासुपूज्य दिगम्बर जैन मंदिर में बाल ब्रह्मचारिणी मानी दीदी झाँसी के निर्देशन में अभिषेक-शांतिधारा की क्रियाएँ संपन्न की गयी। मंदिर समिति ने आचार्य श्री का चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। संतोष शास्त्री ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा पर्यूषण पर्व का तीसरा दिन उत्तम आर्जव का होता है, जो हमें छल-कपट को छोड़कर मायाचारी से दूर रहने के लिए प्रेरित करता है। यह हृदय में ऋजुता को स्थापित करता है एवं स्वयं को मायाजाल में फँसने से बचाता है। वासुपूज्य दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित भक्तामर एवं दशलक्षण महामंडल विधान में राकेश सतभैया, विकास भंडारी, अजित विरधा, पंकज भंडारी, सुनील करैरा, अशोक कुमार, प्रवीन भंडारी, हितेंद्र पवैया आदि ने प्रमुख भूमिका निभाई। दोपहर की बेला में तत्वार्थ सूत्र का स्वाध्याय किया। मानी दीदी ने भगवान महावीर स्वामी के केवल्यज्ञान का प्रसंग सुनाते हुए कहा अहंकार के उदय में मार्दव धर्म नहीं आ सकता, मोक्ष नहीं हो सकता। हमें जीवन में अभिमान और स्वाभिमान के अंतर को समझना है, मान के रहते कभी सत्य का भान नहीं हो सकता, दम्भ सरलता को मार देता है। उन्होंने कहा बाल्टी जब तक कुएँ में झुकेगी नहीं तब तक वह पानी से भरेगी नहीं, मृदुता का भाव रखना मार्दव है। सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत दोनों मंदिरों में संगीतमय आरती एवं फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें छोटे-छोटे बच्चों ने सुंदर मनमोहक प्रस्तुति दी। इस मौके पर जैन मिलन के अध्यक्ष विशाल जैन पवा ने कहा कि जैन धर्म का इतिहास गौरवशाली रहा है जिसमें सम्राट संप्रति, अबक्का चौटा, कुमार पाल, चंद्रगुप्त मौर्य जैसे अनेक जैन सम्राट हुए। कार्यक्रम में सकल दिगंबर जैन समाज का सक्रिय सहयोग रहा। संचालन जैन अनिल जैन एवं मयूर चौधरी ने किया। आभार व्यक्त मंदिर समिति के अध्यक्ष अरुण मोदी एवं पुष्पेंद्र जैन विरधा ने किया।









