सिद्ध क्षेत्र बडागाँव में पंडित सुरेंद्र जी सिंघई ने अपने प्रवचन में बताया सरलता और निष्कपटता को समर्पित होता है।उत्तम आर्जव धर्म का अर्थ और महत्वसरलता : मन, वचन और कर्म में एकरूपता रखना ही आर्जव धर्म है।छल-कपट का त्याग: मन में कुछ और, वचन में कुछ और और कर्म में कुछ और होना मायाचरी (कपट) कहलाता है। इसका त्याग करना आर्जव धर्म है।निष्कपट जीवन: कुटिलता और वक्रता छोड़कर सरल और सच्चा जीवन जीना ही इस दिन की मुख्य सीख है।आत्मा की शुद्धि: यह धर्म अहंकार और माया को मिटाकर आत्मा को निर्मल बनाता है।आप इस विषय में और अधिक जानना चाहते हैं, तो यह वीडियो देख सकते हैं: तीसरा दिन: उत्तम आर्जव धर्म।यदि आप चाहें, तो बता सकते हैं:क्या आप दशलक्षण पर्व के बाकी दिनों केधर्मों के बारे में जानना चाहते हैं?क्या आप पूजा या विधि-विधान से जुड़ी कोई जानकारी चाहते हैं?मैं आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दे सकता हूँ दशलक्षण पर्व का तीसरा दिन उत्तम आर्जव धर्म | तीसरा दिन: उत्तम आर्जव धर्म | पंडित सुरेंद्र कुमार सिंघई ने अपने प्रवचन में बताया कि 10 लक्षण पर्व का जीवन में विशेष महत्व है










