छत्रपति संभाजीनगर : खंडेलवाल दिगंबर जैन पंचायत पार्श्वनाथ मंदिर, राजाबाजार में चल रहे दस दिवसीय पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन ‘उत्तम आर्जव धर्म’ विषय पर परमपूज्य आचार्य श्री विनम्रसागरजी महाराज ने मंगल प्रवचन किया।

आचार्य श्री विनम्रसागरजी महाराज ने कहा कि आर्जव का अर्थ ऋजुता, सरलता और निष्कपटता है। मन में जो है, वही वाणी से व्यक्त करना और उसी के अनुरूप आचरण करना ही आर्जव धर्म है। कपट का पूर्ण अभाव ही आर्जव का वास्तविक स्वरूप है।
मनुष्य का स्वभाव कई बार टेढ़े विचारों की ओर झुक जाता है। इस वक्रता को दूर करने के लिए मन में मृदुता, सरलता और निर्मलता होना आवश्यक है। जिसका मन सरल और निर्मल होता है, उसके पास अधिक धन न होने पर भी वह सुखी और संतोषपूर्ण जीवन जी सकता है। इसलिए मन, वचन और शरीर की प्रत्येक क्रिया में सरलता होना आवश्यक है।
कुटिल भावनाओं और मायाचारी प्रवृत्ति का त्याग कर शुद्ध अंतःकरण से चारित्र्य का पालन करने वाला व्यक्ति घर के साथ-साथ समाज में भी सदाचरण से जीवन व्यतीत करता है। ऐसा व्यक्ति समाज में निष्कलंक, निर्भय, सम्मान और स्वाभिमान के साथ जीवन जीता है।
कपट और धोखे के माध्यम से दूसरे को ठगने वाला व्यक्ति वास्तव में स्वयं को ही धोखा देता है। एक न एक दिन कपट उजागर हो जाता है और उसके दुष्परिणाम संबंधित व्यक्ति को ही भुगतने पड़ते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने विचार, वचन और आचरण में अंतर न रखते हुए अंतर-बाह्य एकरूपता स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए। सरल, सहज और निर्मल जीवन जीने से समाज में प्रेम, आदर और सम्मान प्राप्त होता है, ऐसा आचार्य श्री ने कहा।
विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन
पर्युषण महापर्व के अवसर पर मंदिर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। प्रतिदिन सुबह ध्यान साधना, श्रीजी का अभिषेक एवं पूजन, मुनिराज श्री का पादप्रक्षालन, शास्त्रभेंट तथा अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सुबह 8.30 बजे आचार्य श्री विनम्रसागरजी महाराज का उत्तम आर्जव धर्म विषय पर प्रवचन हुआ। दोपहर में तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन, शाम को प्रतिक्रमण एवं मंगल आरती तथा रात में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
इस अवसर पर राजाबाजार जैन मंदिर में इंद्र-इंद्राणी बनने का सौभाग्य विजयाबाई, निलेश एवं नितीन सेठी परिवार को प्राप्त हुआ, जबकि शांतिमंत्र का सौभाग्य प्रदीप, अजित, कैलास एवं सुनील पाटनी परिवार को मिला।
वहीं हिराकाका प्रांगण में सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य सौ. डॉ. रविंद्र कुमार एवं सौ. डॉ. डॉली, श्री अंबर कासलीवाल परिवार, देवगांव रंगारीवाला, उल्कानगरी तथा सौ. मोना एवं श्री सुनील घेवरचंद पांडे परिवार, पैठण गेट को प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम का सूत्रसंचालन अध्यक्ष महावीर पाटनी ने किया।
इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं से बड़ी संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने का आह्वान श्री खंडेलवाल दिगंबर जैन पंचायत पार्श्वनाथ मंदिर एवं श्री विनम्र चातुर्मास आयोजन समिति, सकल दिगंबर जैन समाज, छत्रपति संभाजीनगर की ओर से किया गया है।









