राजाबाजार जैन मंदिर में धर्मध्वजारोहण के साथ दस दिवसीय पर्युषण महापर्व का उत्साहपूर्ण शुभारंभ मनुष्य कर्मों से महान बनता है, विचारों से बड़ा होता है : आचार्य विनम्र सागरजी महाराज

छत्रपति संभाजीनगर प्रतिनिधि। ख.दि. जैन पंचायत पार्श्वनाथ मंदिर, राजाबाजार में आचार्य विनम्र सागरजी गुरुदेव के ससंघ सान्निध्य में दस दिवसीय पर्युषण महापर्व का आज बड़े उत्साह एवं भक्तिभाव के साथ शुभारंभ हुआ। भगवान शांतिनाथ के मुख्य मंदिर में पंचायत अध्यक्ष महावीर पाटनी के हस्ते धर्मध्वजारोहण कर पर्युषण पर्व की विधिवत शुरुआत की गई।

राजाबाजार जैन मंदिर में दस दिवसीय आयोजन के दौरान इंद्र-इंद्राणी बनने का सौभाग्य विजयादेवी, निलेश, नितीन, उषा, सारिका सेठी परिवार को प्राप्त हुआ। वहीं शांतिधारा का सौभाग्य निलेश कस्तुरचंद पाटनी को मिला। हिराकाका प्रांगण में यजमान इंद्र बनने का सौभाग्य हेमलता, इंद्रचंद, ममता, आशिष चुड़ीवाल, प्रकाश चंदा, सचिन एवं डॉ. राहुल कासलीवाल को प्राप्त हुआ।

इस अवसर पर अरुण पाटनी, महावीर ठोले, यतीन ठोले, ललित पाटनी, किरण पहाड़े, जितेंद्र पाटनी, चंदा कासलीवाल, संतोष सेठी, निलेश सेठी, बाबूसेठ पहाड़े, ताराबाई कासलीवाल, दिलीप कासलीवाल, संदीप गंगवाल, रीमा पाटनी, प्रमोद ठोले, अशोक गंगवाल, प्रमोद पहाड़े, अनिल कासलीवाल, डॉ. शैलेश चांदीवाल सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु उपस्थित थे। इसी के साथ पर्युषण महापर्व के शिविर एवं धार्मिक कार्यक्रमों का भी शुभारंभ हुआ।

पर्युषण पर्व के प्रथम दिवस उत्तम क्षमा धर्म के पावन अवसर पर भगवान शांतिनाथ का पंचामृत अभिषेक एवं महाशांतिधारा संपन्न हुई। णमोकार भक्ति मंडल द्वारा प्रस्तुत सुमधुर संगीतमय भक्तिगीतों के बीच संपूर्ण पंचामृत अभिषेक विधि भक्तिभाव से संपन्न हुई।

इस अवसर पर आचार्य विनम्र सागरजी गुरुदेव ने ‘उत्तम क्षमा धर्म’ विषय पर प्रवचन देते हुए कहा कि आत्मा में उत्पन्न होने वाले क्रोधरूपी विकार को समाप्त करना ही क्षमा गुण को प्रकट करना है। “क्षमा वीरस्य भूषणम्” अर्थात क्षमा करना वीर पुरुषों तथा साधु-संतों का आभूषण है।

उन्होंने कहा कि क्षमा आत्मा का निज धर्म है। यह जीव की शुद्ध परिणति और विश्वप्रेम का अमूल्य खजाना है। जहां क्षमा है, वहां राग-द्वेष के लिए कोई स्थान नहीं होता। मन में राग-द्वेष एवं वैरभाव रखने से शत्रुता बढ़ती है और यही दुर्गति का कारण बनती है। इसलिए मनुष्य को वैरभाव छोड़कर आत्मा को शांति प्रदान करने का प्रयास करना चाहिए।

आचार्यश्री ने कहा कि क्षमा करने से मनुष्य के मन, वचन और काया—तीनों की शुद्धि होती है। इससे संतोष, संयम, निराकुलता आदि गुणों में वृद्धि होती है। इसलिए मनुष्य को बड़े प्रयासपूर्वक सभी जीवों से क्षमा मांगनी चाहिए और सभी जीवों को क्षमा करना चाहिए।

उन्होंने अपने उद्बोधन के अंत में कहा कि “मनुष्य कर्मों से महान बनता है, विचारों से बड़ा होता है।”

सायंकाल 7 बजे भगवान शांतिनाथ की आरती एवं शास्त्र वाचन का आयोजन किया गया। संपूर्ण कार्यक्रम में राजाबाजार सहित आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं समाजबंधु उपस्थित रहे। इस अवसर पर मंदिर के विश्वस्त, कार्यकारिणी मंडल, विभिन्न मंडलों के पदाधिकारी तथा विनम्र चातुर्मास समिति के सदस्य उपस्थित थे।

दस दिवसीय पर्युषण महापर्व के अवसर पर मंदिर परिसर में आकर्षक विद्युत रोशनी की सजावट भी की गई है, जिससे मंदिर परिसर भक्तिमय एवं आकर्षक नजर आ रहा है।

उक्त जानकारी विश्वस्त कार्यकारिणी मंडल की ओर से प्रचार-प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा एवं पियुष कासलीवाल ने पत्रक के माध्यम से दी।

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रामजी तिवारी मड़ावरा

चीफ एडिटर – स्वराज भास्कर

रामजी तिवारी मड़ावरा एक अनुभवी और निष्पक्ष पत्रकार हैं, जो उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश की जमीनी खबरों को सटीकता और विश्वसनीयता के साथ प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्षों के अनुभव के साथ, उनका उद्देश्य समाज तक सच्ची, निष्पक्ष और प्रभावशाली खबरें पहुंचाना है।

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