तप, त्याग और उपवास की साधना से पूरे भारत में बढ़ाया टीकमगढ़ जैन समाज का गौरव

टीकमगढ़। नगर गौरव पूज्य प्रत्यक्ष सागर जी महामुनिराज का आज समाधि दिवस श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर टीकमगढ़ दिगंबर जैन समाज एवं धर्म प्रभावना समिति की ओर से पूज्य महामुनिराज को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए विनम्र नमन किया गया।
धर्म प्रभावना समिति के अध्यक्ष नरेंद्र जनता ने जानकारी देते हुए बताया कि पूज्य प्रत्यक्ष सागर जी महामुनिराज ने अपने जीवन में अद्भुत तप, त्याग, संयम और कठिन साधना का परिचय दिया। उन्होंने 32 उपवास जैसे कठिन तप के माध्यम से जैन धर्म की प्रभावना को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी कठोर तपस्या और आत्मसंयम ने न केवल टीकमगढ़, बल्कि पूरे भारत में जैन समाज का गौरव बढ़ाया।

पूज्य महामुनिराज का संपूर्ण जीवन त्याग, तपस्या, आत्मसंयम और धर्म के प्रति समर्पण की प्रेरणादायी मिसाल रहा। उनकी साधना और तप की गाथा आज भी समाज के लोगों को धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने तथा आत्मकल्याण की दिशा में प्रेरित करती है।
समाधि दिवस पर जैन समाज के श्रद्धालुओं ने पूज्य प्रत्यक्ष सागर जी महामुनिराज की पुण्य स्मृति को नमन करते हुए उनके बताए धर्म और संयम के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।









