‘पूरी दुनिया एक कम्बाइंड फैमिली, पत्थर और पेड़ को भी नुकसान पहुंचाना अपने विनाश को बुलावा देना’ अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने दिए मार्मिक उपदेश; कहा- पैसे से सुख-सुविधाएं मिल सकती हैं, सुकून का भाव नहीं

औरंगाबाद पुष्पगिरी तीर्थ (सोनकच्छ)

“खरीद लो पैसों से संसार की सारे सुख-सुविधाओं को… बस जाते-जाते इतना बता देना कि सुकून का भाव क्या था?”

यह मर्मस्पर्शी और विचारणीय उद्गार अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने पुष्पगिरी तीर्थ पर उपस्थित विशाल गुरुभक्त जनमेदिनी को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

परम पूज्य पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागरजी महाराज के पावन सानिध्य में अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय श्री पीयूष सागरजी महाराज ससंघ पुष्पगिरी तीर्थ पर वर्षायोग (चातुर्मास) हेतु विराजमान हैं। वर्षायोग के अंतर्गत तीर्थ क्षेत्र पर प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है।

इसी श्रृंखला में गुरुभक्तों को जीवन का सार बताते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने पर्यावरण और जीवन के अंतरसंबंधों पर प्रकाश डाला।

ब्रह्मांड एक संयुक्त परिवार, हर जीव का अस्तित्व एक-दूसरे से जुड़ा

प्रवचन के दौरान आचार्य श्री ने कहा कि इस संसार में कुछ भी व्यर्थ नहीं है। जीवन से जीवन जुड़ा हुआ है। मनुष्य जाति अकेली जिंदा नहीं रह सकती, उसे जीवित रहने के लिए पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों और सागर-सरिताओं का साथ अनिवार्य है। वास्तव में पूरी दुनिया एक ‘कम्बाइंड फैमिली’ (संयुक्त परिवार) है और यह पूरा ब्रह्मांड एक-दूसरे का पूरक है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि आपके घर के सामने पड़ा एक साधारण पत्थर या खड़ा कोई पेड़ भी व्यर्थ नहीं है। कहीं न कहीं, किसी न किसी रूप में हमारा जीवन उनसे जुड़ा है। उस पत्थर को क्षति पहुंचाना या उस पेड़ को नष्ट करना, परोक्ष रूप से स्वयं के विनाश को आमंत्रित करने जैसा है।

वृक्षों का विनाश अंततः मानव अस्तित्व के लिए खतरा

पर्यावरण संतुलन पर चिंता व्यक्त करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि पहले मनुष्य ने अंधाधुंध कटाई करके हरे-भरे जंगलों और पहाड़ों को उजाड़ दिया। लेकिन जब पर्यावरण की दृष्टि से यह अहसास हुआ कि जीवन के अस्तित्व के लिए वृक्षों का होना अत्यंत आवश्यक है, तब जाकर जोर-शोर से वृक्षारोपण अभियान शुरू किए गए।

उन्होंने सीख देते हुए कहा कि “जब जागो तब सवेरा।” समय रहते प्रकृति और पर्यावरण के प्रति सचेत होना ही मानव जाति की भलाई है।यह जानकारी प्रचार-प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा एवं पीयूष कासलीवाल, औरंगाबाद द्वारा प्रदान की गई है।

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रामजी तिवारी मड़ावरा

चीफ एडिटर – स्वराज भास्कर

रामजी तिवारी मड़ावरा एक अनुभवी और निष्पक्ष पत्रकार हैं, जो उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश की जमीनी खबरों को सटीकता और विश्वसनीयता के साथ प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्षों के अनुभव के साथ, उनका उद्देश्य समाज तक सच्ची, निष्पक्ष और प्रभावशाली खबरें पहुंचाना है।

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