बोले— धर्म, ईमान और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाले जनप्रतिनिधियों को ही चुनें; राजनीति में से नीति निकालने वालों से रहें सावधान

औरंगाबाद/पुष्पगिरी। “जिद, गुस्सा, गलती, लालच और अपमान नेताओं की तरह होते हैं। जो दूसरा करे तो चुभते हैं, लेकिन स्वयं करें तो उसका एहसास तक नहीं होता।” यह विचार अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज ने पुष्पगिरी तीर्थ में गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता गणाचार्य श्री 108 पुष्पदंत सागरजी महाराज के मंगल सानिध्य में अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय श्री पियूष सागरजी महाराज ससंघ वर्षायोग के लिए पुष्पगिरी में विराजमान हैं। उनके सानिध्य में विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर किया जा रहा है। इसी श्रृंखला में गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्यश्री ने सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन में नैतिक मूल्यों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
आचार्यश्री ने कहा कि जनप्रतिनिधि चुनते समय केवल राजनीतिक दल या व्यक्ति को नहीं, बल्कि उसके धर्म, ईमान, चरित्र और राष्ट्रहित के प्रति प्रतिबद्धता को देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को लोकसभा और विधानसभा में नहीं भेजना चाहिए, जो राजनीति में से ‘नीति’ को ही निकाल देना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि जो लोग बात तो अखंडता की करते हैं, लेकिन उनके कार्य खंडन की दिशा में होते हैं, ऐसे लोगों से समाज को सावधान रहना चाहिए। भारतीय होकर भी मानसिक रूप से विदेशी भाषा और संस्कृति की गुलामी करने वालों को जनप्रतिनिधि चुनने से पहले जनता को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
कथनी और करनी में अंतर नहीं होना चाहिए
आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि जो लोग राम, कृष्ण, बुद्ध और महावीर का नाम लेकर जनता से समर्थन मांगते हैं, लेकिन वर्तमान संदर्भ में उनके विचारों को अप्रासंगिक मानते हैं, उनकी कथनी और करनी को समझना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि गरीबों का मसीहा बनने का दावा करने वाले, लेकिन स्वयं विलासितापूर्ण जीवन जीने वाले लोगों से भी जनता को सवाल करना चाहिए। इसी प्रकार देशभक्ति के भाषण देने वाले नेताओं के आचरण और उनके जीवन-मूल्यों का भी मूल्यांकन होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जो दल अथवा पार्टी को देश से बड़ा समझते हैं, जो भ्रष्टाचार को शिष्टाचार का जामा पहनाने का प्रयास करते हैं, ऐसे लोगों को सत्ता की जिम्मेदारी सौंपना समाज और राष्ट्र के लिए घातक हो सकता है।
‘गलत आदमी का समर्थन नहीं करेंगे’ का संकल्प लें
आचार्यश्री ने कहा कि गलत व्यक्ति को चुनना अपने ही हाथों से अपने पैरों पर कुठाराघात करने जैसा है। गलत व्यक्ति का समर्थन करना भ्रष्टाचार को प्रश्रय देना है।
उन्होंने गुरु भक्तों एवं समाज से आह्वान करते हुए कहा कि हम गलत आदमी को नहीं चुनेंगे और न ही गलत आदमी का समर्थन करेंगे। ऐसा संकल्प ही विकृत एवं गंदी राजनीति के सुधार का कारण बन सकता है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की जागरूकता ही सबसे बड़ी शक्ति है। यदि मतदाता जाति, दल, व्यक्तिगत संबंध अथवा अन्य प्रलोभनों से ऊपर उठकर योग्य, ईमानदार, चरित्रवान और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने वाले व्यक्ति का चयन करें, तो राजनीति में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
प्रचार-प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा एवं पियूष कासलीवाल, औरंगाबाद ने उक्त जानकारी दी।

coming soon








