छतरपुर / बिजावर:

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के अंतर्गत आने वाली जनपद पंचायत बिजावर की ग्राम पंचायत एरोरा में शासकीय राशि के दुरुपयोग और बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। पंचायत दर्पण पोर्टल पर अपलोड किए गए बिलों और विवरणों से यह खुलासा हुआ है कि विकास कार्यों और कार्यालयीन खर्चों के नाम पर भारी-भरकम राशि का आहरण किया गया है, लेकिन पोर्टल पर जो बिल चस्पा किए गए हैं, वे पूरी तरह से धुंधले, अस्पष्ट और संदिग्ध हैं।
पोर्टल पर दर्ज प्रमुख संदिग्ध मामलों का विवरण:
बिल क्रमांक 63 (दिनांक 05/05/2026): पंच परमेश्वर योजना के तहत संजय विश्वकर्मा के नाम पर कार्यालयीन व्यय मद में 4,200 रुपये का भुगतान किया गया है, जिसका बिल पूरी तरह धुंधला है।
बिल क्रमांक 106 (दिनांक 12/05/2026): 5वें राज्य वित्त आयोग के तहत जयप्रकाश दुबे के नाम पर 12,000 रुपये की राशि निकाली गई है।
बिल क्रमांक 510 (दिनांक 10/05/2026): पंच परमेश्वर योजना के अंतर्गत राशिद खान के नाम पर 10,500 रुपये का भुगतान दर्शाया गया है।
बिल क्रमांक 48 (दिनांक 08/05/2026): पुष्पेंद्र सिंह यादव के नाम पर 15,000 रुपये की राशि आहरित की गई है।
बिल क्रमांक 49 (दिनांक 08/05/2026): बब्बूलाल अहिरवार के नाम पर 5,000 रुपये का भुगतान किया गया है।
बिल क्रमांक 105 (दिनांक 12/05/2026): 5वें राज्य वित्त आयोग के तहत जयप्रकाश दुबे के नाम पर ही 29,068 रुपये की बड़ी राशि निकाली गई है, जिसमें अपलोड किया गया बिल भी स्पष्ट नहीं है।
बिल क्रमांक 68 (दिनांक 28/04/2026): संजय विश्वकर्मा के नाम पर 5,250 रुपये का भुगतान किया गया है।
पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल
इन सभी मामलों में हैरानी की बात यह है कि अधिकांश भुगतानों का भुगतान दिनांक 15/05/2026 को एक ही दिन (EPO Number: 3874725 के माध्यम से) दर्शाया गया है। पोर्टल पर बिलों की तस्वीरें इस तरह से धुंधली अपलोड की गई हैं कि उनमें खरीदी गई सामग्री या सेवाओं की वास्तविक सत्यता को छुपाया जा सके। सूची में ‘Particular’ के आगे ‘Test’ और ‘Name’ के आगे मोटर या अन्य नाम लिखकर महज औपचारिकता पूरी की गई है, जो सीधे तौर पर वित्तीय फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और ग्रामीणों ने इस मामलों की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि पंचायत स्तर पर इस प्रकार के फर्जी और धुंधले बिल लगाकर शासकीय राशि का बंदरबांट किया जाता रहा, तो ग्रामीण विकास के योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएंगी। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) से मांग की है कि ग्राम पंचायत एरोरा के इन सभी भुगतानों की गहराई से जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।









