मायामृग के पीछे दौड़े श्रीराम, शबरी के आश्रम के बाद हुई राम-सुग्रीव की मित्रता

महरौनी (ललितपुर)।
श्री रामयश कीर्तन मंडली महरौनी के तत्वावधान में आयोजित 89वें श्री रामलीला महोत्सव के दसवें दिन सीताहरण एवं राम-सुग्रीव मित्रता की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों के सजीव अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
लीला के प्रथम दृश्य में सूर्पणखा सुंदर रूप धारण कर श्रीराम और लक्ष्मण के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखती है। दोनों भाइयों के बीच भेजने का क्रम चलता रहा। क्रोधित होकर सूर्पणखा सीता पर झपटती है, तो लक्ष्मण उसके नाक-कान काट देते हैं। इसके बाद खर-दूषण युद्ध के लिए श्रीराम को ललकारते हैं, लेकिन भगवान राम उनका वध कर देते हैं।
अपमानित सूर्पणखा रावण को अपनी व्यथा सुनाती है। रावण के कहने पर मारीच स्वर्ण मृग का रूप धारण करता है। सीता की इच्छा पूरी करने के लिए श्रीराम मृग के पीछे जाते हैं। मारीच की मायावी आवाज सुनकर सीता के आग्रह पर लक्ष्मण भी उनकी सहायता के लिए चले जाते हैं। जाने से पहले वे सीता की सुरक्षा के लिए लक्ष्मण रेखा खींचते हैं। साधु वेश में पहुंचे रावण के छल में फंसकर सीता रेखा पार कर देती हैं और रावण उनका हरण कर लंका की ओर चल देता है। सीता को बचाने पहुंचे जटायु से युद्ध में रावण उसके पंख काट देता है।
सीता की खोज में वन-वन भटकते श्रीराम और लक्ष्मण घायल जटायु से मिलते हैं। जटायु उन्हें सीताहरण का समाचार देकर प्राण त्याग देता है। इसके बाद दोनों भाई शबरी के आश्रम पहुंचते हैं, जहां श्रीराम प्रेमपूर्वक उनके जूठे बेर खाते हैं। शबरी के मार्गदर्शन पर वे ऋष्यमूक पर्वत पहुंचकर हनुमानजी की पहल से सुग्रीव से मिलते हैं। अग्नि को साक्षी मानकर राम-सुग्रीव की मित्रता होती है और दोनों एक-दूसरे की सहायता का वचन देते हैं।
कलाकारों के अभिनय ने मोहा मन
सुंदरी सूर्पणखा के प्रणय गीतों और नृत्य ने दर्शकों का मनोरंजन किया, वहीं राक्षसी रूप में उसके अभिनय को भी खूब सराहना मिली। सीता की खोज में श्रीराम और लक्ष्मण के विलाप के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
इनकी रही सहभागिता
लीला मंचन के दौरान प्रारंभिक आरती पं. मनोज पाण्डेय (सेवानिवृत्त राजस्व निरीक्षक) के सुपुत्र शिवम पांडेय, विवेक राय (शिक्षक), दिनेश श्रीवास्तव (शिक्षक), राजेश जैन (ब्लॉक अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ), संतोष गुप्ता (शिक्षक), अनिल जैन सिलौनिया (शिक्षक), राहुल देव वर्मा (शिक्षक), कपिल देव वर्मा (लिपिक), प्रेमनारायण साहू (पार्षद), सुखवती साहू (पार्षद) तथा सत्यनारायण खरे के प्रतिनिधि सौरभ खरे ने उतारी।
वहीं मध्यक्रम की आरती पं. निखिल तिवारी, कृष्णा अमर सिंह (पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष), विनोद मिश्रा (कोतवाली प्रभारी, माधौगढ़) के प्रतिनिधि प्रखर मिश्रा, रामविलास रजक (सपा नेता), राजेश रिछारिया (शिक्षक), खेमचंद रजक एवं प्रभाकर मिश्रा ने की।
लीला मंचन में आदर्श उदैनिया, उदय बिरथरे, रुद्रांश भौंडेले, सूर्यकान्त त्रिपाठी, सत्येन्द्र भर्ता, अखिलेश सोनी, अमित नायक, राजबहादुर खरे, महिपाल सिंह, रोहित तिवारी, भगवत भोंडेले, विवेक तिवारी, प्रखर मिश्रा और भूरे नामदेव सहित अन्य कलाकारों ने सराहनीय अभिनय किया।








