महरौनी,ललितपुर।
श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर, महरौनी में ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान आयोजित श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर बच्चों, युवाओं एवं महिलाओं को धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रहा है। शिविर में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं तथा बालक-बालिकाएं सहभागिता कर धार्मिक एवं सांस्कारिक शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
जगतपूज्य आचार्य श्री सुधासागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से संचालित इस शिविर का मार्गदर्शन सांगानेर के विद्वान प्रशिक्षक अतिशय जैन एवं अक्षय जैन द्वारा किया जा रहा है। उनके निर्देशन में प्रतिभागियों को जैन धर्म के सिद्धांतों, संस्कारों, व्यक्तित्व विकास, सामाजिक दायित्वों एवं आदर्श जीवनशैली की जानकारी दी जा रही है।
शिविर में प्रतिदिन प्रार्थना, नमोकार मंत्र, स्वाध्याय, धार्मिक प्रश्नोत्तरी, संस्कार गीत, जैन इतिहास तथा तीर्थंकरों के जीवन प्रसंगों पर आधारित विविध सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। बच्चों को खेल-खेल में नैतिक शिक्षा प्रदान की जा रही है, वहीं महिलाओं को पारिवारिक संस्कार, सामाजिक समरसता एवं आध्यात्मिक जीवन के महत्व से अवगत कराया जा रहा है।
अखिल भारतीय जैन महिला परिषद की संभागीय अध्यक्ष रश्मि मलैया ने बताया कि वर्तमान समय में बच्चों को डिजिटल माध्यमों के प्रभाव से निकालकर संस्कारों से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह शिविर प्रतिभागियों में धर्म, अनुशासन, सेवा, सदाचार एवं आत्मविकास की भावना विकसित कर रहा है।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण में संचालित यह शिविर नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, जैन परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने की दिशा में एक प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय पहल साबित हो रहा है।








