*बांसी (ललितपुर)।* मंगलवार की रात रामलीला के दूसरे दिन रावण दिग्विजय और श्रीराम जन्म की लीला का मंचन हुआ। लीला देखने बड़ी तादाद में लोग मौजूद रहे। गुरुवार की रात धनुष यज्ञ की लीला होगी।

कस्बा के श्री हनुमान जी टौरिया मंदिर में, कस्बा के कीर्तिशेष कलाकारों एवं सहयोगियों की स्मृति में, श्री हनुमान जी टौरिया मंदिर समिति द्वारा स्थानीय कलाकारों के द्वारा कस्बा की ऐतिहासिक रामलीला की परंपरा को 20 वर्ष बाद पुनः शुरू किया गया है। सोमवार को वाल्मीकि जयंती पर शिव-पार्वती संवाद और नारद मोह की लीला के मंचन के बाद, मंगलवार को रावण दिग्विजय और श्रीराम जन्म की लीला का मंचन किया गया।
दूसरे दिन लीला की शुरुआत रावण, कुंभकरण, विभीषण की तपस्या से शुरू हुई। तीनों भाइयों की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ब्रह्मा ने आकर वरदान दिए। उसके बाद रावण ने मयदानव की पुत्री मंदोदरी से विवाह किया। कुबेर पर धावा बोलकर पुष्पक विमान और लंका को कुबेर से छीन लिया। अपने पुत्र मेघनाद को भेजकर सभी देवताओं को बंदी बना लिया और अपनी इच्छा अनुसार उन्हें काम सौंप दिया। देवताओं और पृथ्वी ने अपनी पीड़ा भगवान ब्रह्मा और शंकर जी को सुनाई। सबने मिलकर प्रार्थना की –
कमल नयन कमला पति स्वामी, अब तो लो अवतार दयानिधि अब तो लो अवतार, इतने बहुत अन्याय हुए हैं, आप सिंधु में पड़े हुए हैं, हम कर जोड़े खड़े हुए हैं।”
देवताओं की प्रार्थना सुनकर आकाशवाणी हुई कि हम अंशों सहित अवतार लेंगे। इधर अयोध्या के राजा दशरथ को चौथेपन तक संतान न होने का दुःख सताने लगा। उन्होंने गुरु वशिष्ठ को बुलाकर अपनी चिंता सुनाई, जिसे सुनकर गुरु वशिष्ठ ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराया, जिसमें अग्नि देव ने प्रकट होकर राजा दशरथ को हवि दी। जिसे खाकर तीनों रानियों के यहाँ चार पुत्रों का जन्म हुआ। गुरु वशिष्ठ ने उनका नाम राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न रखा। चारों भाइयों ने गुरु के आश्रम जाकर विद्या अध्ययन किया। इसी के साथ दूसरे दिन की लीला सम्पन्न हुई। इसे देखने दर्शकों की बड़ी भीड़ रही।
मंदिर समिति के प्रबंधक सुदामा प्रसाद दुबे ने बताया कि गुरुवार की रात रामलीला में धनुष यज्ञ की लीला का मंचन होगा।







