महरौनी,ललितपुर।
सहजनी शिक्षा केन्द्र के तत्वावधान में जिले के पांच विकासखंडों में महिला हिंसा के खिलाफ व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत समुदाय, स्कूलों, महाविद्यालयों तथा विभिन्न स्टेकहोल्डर्स के बीच लैंगिक असमानता, भेदभाव और महिलाओं के विरुद्ध होने वाली हिंसा के प्रति जागरूकता विकसित करने का कार्य किया जा रहा है।

कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए नुक्कड़ नाटक, फड़, समूह चर्चा, गीत, नारे एवं अन्य सांस्कृतिक माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। इन गतिविधियों के दौरान गांवों से कई गंभीर सामाजिक मुद्दे सामने आए हैं। चर्चा में यह बात उभरकर आई कि मायके और ससुराल दोनों स्थानों पर कई महिलाओं को विभिन्न प्रकार की हिंसा का सामना करना पड़ता है। वहीं महिला हत्या जैसे गंभीर मामलों में भी कई बार आर्थिक लेन-देन के आधार पर समझौते कर दिए जाते हैं, जिससे ऐसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाता।
अभियान के दौरान यह भी बताया गया कि महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा का सीधा असर उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ता है, लेकिन अधिकांश मामलों को ‘घरेलू मामला’ मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। यही कारण है कि हत्या और आत्महत्या जैसी घटनाओं में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि समाज अपनी चुप्पी नहीं तोड़ेगा तो बहू-बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना कठिन होगा। उन्होंने प्रश्न उठाया कि आखिर आर्थिक मुआवजे या रकम के आधार पर समझौते कब तक होते रहेंगे।
वक्ताओं ने कहा कि घरेलू हिंसा और सामाजिक दबाव से परेशान होकर कई महिलाएं आत्महत्या जैसा गंभीर कदम उठाने को मजबूर हो जाती हैं, जबकि कई मामलों में उनकी हत्या को आत्महत्या का रूप देकर समझौता कर लिया जाता है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई तथा समाज की सक्रिय भागीदारी समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।








