प्रधान समेत दर्जनों ग्रामीणों ने डीएम से की जांच व कार्रवाई की मांग

महरौनी (ललितपुर)।
तहसील क्षेत्र के ग्राम डोंगराखुर्द में कथित रूप से नायब तहसीलदार के फर्जी हस्ताक्षरों से तैयार भूमि आवंटन निरस्ती आदेश ग्रामीणों के बीच वितरित किए जाने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया। मामले को गंभीर मानते हुए ग्राम प्रधान सेनापति सहित दर्जनों ग्रामीणों ने शनिवार को महरौनी में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच एवं दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि ग्राम के ही कुछ लोगों द्वारा नायब तहसीलदार महरौनी के हस्ताक्षरों से युक्त भूमि आवंटन निरस्ती आदेश की प्रतियां ग्रामीणों में वितरित की गईं। आदेश की सत्यता पर संदेह होने पर ग्रामीण संबंधित अधिकारी के पास पहुंचे, जहां नायब तहसीलदार धीरेन्द्र कुमार ने स्पष्ट रूप से कहा कि न तो उनके द्वारा ऐसा कोई आदेश जारी किया गया है और न ही आदेश पर अंकित हस्ताक्षर उनके हैं।
नायब तहसीलदार ने आशंका व्यक्त की कि आदेश किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा कूटरचित (फर्जी) तैयार किया गया हो सकता है। उन्होंने संबंधित आदेश की प्रति प्राप्त कर थाना मड़ावरा प्रभारी के नाम प्रार्थना पत्र प्रेषित करते हुए पूरे प्रकरण की विधिवत जांच कराने का अनुरोध किया है।
प्रार्थना पत्र में मांग की गई है कि कथित फर्जी शासकीय आदेश को सुरक्षित रखते हुए उसके हस्ताक्षरों की हैंडराइटिंग एवं फॉरेंसिक जांच कराई जाए। यदि जांच में कूटरचना की पुष्टि होती है तो दोषियों के विरुद्ध भारतीय कानून के तहत एफआईआर दर्ज कर कठोर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इधर, कथित निरस्ती आदेश के प्रसार से ग्रामीणों में भय और भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि फर्जी आदेश के माध्यम से न केवल अफवाह फैलाकर लोगों को गुमराह किया गया, बल्कि मानसिक प्रताड़ना भी दी गई। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे कृत्य में शामिल व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी शासकीय दस्तावेजों की कूटरचना कर जनता को भ्रमित न कर सके।
फिलहाल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है तथा जांच रिपोर्ट के आधार पर अग्रिम कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है।








