ललितपुर। श्री सिद्धपीठ चंडी मंदिर धाम पर सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण व श्रीरूद्रमहायज्ञ आयोजन में रविवार को श्रद्धालुओं ने 15 लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण किया। वहीं प्रातः कालीन बेला में श्रीरूद्रमहायज्ञ में पीठ पूजन किया गया। पूजन प्रधान यजमान हरिशंकर साहू सहित अन्य यजमानों द्वारा किया गया।
अपराह्न में पार्थिव शिवलिंग का पूजन व महारूद्धाभिषेक तहसीलदार सदर ने किया किया। तत्पश्चात श्रद्धालुओं को कथा सुनाते हुए परमूज्य गुरूदेव ने कहाकि भगवान भोलेनाथ की महिमा अपरम्पार हैं। भगवान शिव के महामृत्युजंय के जप से मनुष्य के हर संकट का नाश होता हैं। क्योंकि महामृत्युजंय मंत्र के प्रत्येक अक्षर में भगवान भोलेनाथ का वास हैं। मंत्र की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहाकि हम भगवान शंकर की पूजा करते हैं, जिनके तीन नेत्र है जो प्रत्येक श्वास मे हैं, जीवन में शक्ति का संचारकरते है, जो सम्पूर्ण जगत का पालन-पोषण अपनी शक्ति से कर करते है। उनसे हमारी प्रार्थना है कि वे हमे मृत्यु के बंधनो से मुक्त कर दे, जिससे हमे मोक्ष की प्राप्ति हो जाए, इस आराधना के पश्चात् व्यकित जन्म-मृत्यु के बन्धनो से सदा के लिए मुक्त हो जाता हैं, तथा आपके चरणों की अमृतधारा का पान करते हुए भवसागर से पार होता हैं। इसलिए व्यक्ति को भोलेनाथ के महामृत्युजंय महामंत्र का जाप करना चाहिए। उन्होंने कहाकि भगवान शिव भोलेनाथ हैं। भोलेनाथ उन्हें इसलिए कहते हैं कि भगवान शंकर को “भोलेनाथ” की उपाधि इस कारण मिली कि वह स्वभाव से बेहद भोले हैं! भगवान शंकर जी को रूद्र देवता के रूप मे जाने जाते है जो अगर एक बार गुस्सा हो जाएं तो प्रलय आ जाता है लेकिन यह शंकर जी का ही रूप है जो मात्र जलऔर बेलपत्र से प्रसन्न होकर भक्त की सभी तरह के मनोकामनायें पूर्ण करते हैं। इसलिए ब्रह्माड के सभी जीव भोलेनाथ की आराधना करते हैं। क्या देव,क्या दानव सभी भगवान भोलेनाथ की आराधना कर मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं। तत्पश्चात महाआरती व प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहें।









