समूहबद्ध अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन-तिलहन अंतर्गत कृषकों को दिया गया सोयाबीन का बीज

बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र, ललितपुर के केंद्राध्यक्ष डॉ. मुकेश चंद के नेतृत्व में विकास खंड बिरधा के ग्राम सिंगेपुर के 25 कृषकों प्रति कृषक प्रति एकड़ की दर सोयाबीन (प्रजाति आर.वी.एस.एम. 1135) का 30 बीज उपलब्ध कराया गया। डॉ. दिनेश तिवारी, विषय वस्तु विशेषज्ञ-सस्य विज्ञान/ नोडल अधिकारी -समूहबद्ध अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन तिलहन द्वारा कृषकों को सोयाबीन की उन्नत कृषगत क्रियाओं जैसे खेत की तैयारी, बीज की बुवाई तकनीक, पोषक तत्वों का प्रबंधन, खरपतवार प्रबंधन, कीट और बीमारियों का नियंत्रण आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। डॉ. तिवारी ने बताया कि समूहबद्ध अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन-तिलहन योजना के माध्यम से जनपद ललितपुर में सोयाबीन का क्षेत्रफल, उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने के लिए कृषक बंधु को सोयाबीन की नवीनतम प्रजाति आर.वी.एस.एम. 1135 उपलब्ध कराया गया है। सोयाबीन की उन्नत प्रजाति आर.वी.एस.एम. 1135 एक अत्यधिक लोकप्रिय और उच्च उपज देने वाली रिसर्च किस्म है। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर, मध्य प्रदेश द्वारा विकसित की गई है। यह किस्म 95 से 110 दिनों में पककर पूरी तरह तैयार हो जाती है। इसका तना मजबूत होता है और पौधा लगभग 50 से 85 सेंटीमीटर तक ऊंचा होता है। इसमें सफेद फूल आते हैं और पौधे में अच्छी शाखाएं (मल्टी-स्टेम) निकलती हैं। इसकी फलियां बिल्कुल चिकनी होती हैं (रोएं/बाल नहीं होते) और इनमें चटकने की समस्या नहीं होती है। अधिकांश फलियों में 3 से 4 दाने पाए जाते हैं। उन्नत प्रबंधन के तहत किसान इससे 12 से 15 क्विंटल प्रति एकड़ तक उपज प्राप्त कर सकते हैं। कृषक बन्धुओं को कृषि विज्ञान केन्द्र, ललितपुर से जुड़कर समय समय पर आवश्यकता अनुसार वैज्ञानिक और तकनीकी जानकारी लेते रहने के लिए प्रेरित किया गया।

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रामजी तिवारी मड़ावरा

चीफ एडिटर – स्वराज भास्कर

रामजी तिवारी मड़ावरा एक अनुभवी और निष्पक्ष पत्रकार हैं, जो उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश की जमीनी खबरों को सटीकता और विश्वसनीयता के साथ प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्षों के अनुभव के साथ, उनका उद्देश्य समाज तक सच्ची, निष्पक्ष और प्रभावशाली खबरें पहुंचाना है।

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