महरौनी, ललितपुर।
मनरेगा का नाम बदलकर शुरू की गई नई वीबीजी योजना की शुरुआत पहले ही दिन फीकी नजर आई। अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदेशभर के ग्राम रोजगार सेवक एवं अन्य मनरेगा कार्मिक धरने पर बैठ गए, जिससे योजना का संचालन भी प्रभावित हो रहा है।
ग्राम रोजगार सेवकों का कहना है कि नई योजना में उनके हितों की अनदेखी की गई है। मजदूरों की दैनिक मजदूरी बढ़ाकर लगभग 300 रुपये कर दी गई है, जबकि रोजगार सेवकों का मासिक मानदेय अब भी करीब 7,000 रुपये ही है। साथ ही, योजना को पूरी तरह डिजिटल बनाए जाने के कारण उन्हें महंगा स्मार्टफोन रखने की मजबूरी है, जबकि मानदेय में कोई वृद्धि नहीं की गई।
कार्मिकों का आरोप है कि उन्हें न मानव संसाधन नीति का लाभ मिल रहा है और न ही बढ़ती महंगाई के अनुरूप मानदेय। उनका कहना है कि वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता तो आज उन्हें अपनी मांगों के लिए धरना देने को मजबूर नहीं होना पड़ता।









