ललितपुर।
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर जिले में बाल अधिकारों की सुरक्षा एवं बाल श्रम उन्मूलन के क्षेत्र में सक्रिय सामाजिक संस्था बुन्देलखण्ड सेवा संस्थान द्वारा जिला स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सभागार में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय सिविल जज (सीनियर डिवीजन) एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, श्रीमती ईशा त्रिपाठी ने की। संगोष्ठी में बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण, बच्चों के शिक्षा एवं संरक्षण के अधिकारों तथा विभिन्न विभागों एवं समुदाय की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई।
माननीय सिविल जज (सीनियर डिवीजन) एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती ईशा त्रिपाठी ने संस्थान द्वारा किए जा रहे बाल संरक्षण कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि बाल श्रम समाज के समग्र विकास में एक बड़ी बाधा है। प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा एवं सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि बुन्देलखण्ड सेवा संस्थान द्वारा पुलिस एवं प्रशासन के सहयोग से बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराकर उन्हें शिक्षा एवं मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य अत्यंत सराहनीय है। यह प्रयास न केवल बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने उपस्थित लोगो से कहा कि बाल श्रम, बाल विवाह एवं बाल तस्करी जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध सामूहिक रूप से कार्य करें तथा किसी भी बच्चे के शोषण की सूचना तत्काल संबंधित विभागों को दें। उन्होंने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना केवल प्रशासन की ही नहीं बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की नैतिक एवं कानूनी जिम्मेदारी है।
बुन्देलखण्ड सेवा संस्थान के निदेशक वासुदेव सिंह ने कहा, बाल श्रम बच्चों को उनके बचपन और मूल अधिकारों से महरूम कर देता है, लिहाजा इस समस्या से तत्काल निपटने की जरूरत है। बच्चों की जगह ढाबों और फैक्ट्रियों में नहीं बल्कि स्कूल में है। चूंकि ट्रैफिकिंग और बाल मजदूरी आपसे में गहरे तक जुड़े हैं, हम ट्रैफिकिंग की रोकथाम, बच्चों को मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन प्रशासन व कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ करीबी समन्वय के साथ काम करते रहेंगे। साथ ही, हम सुनिश्चित करेंगे कि हर बच्चे की देखभाल हो, समुचित पुनर्वास हो और उसे वो सभी सुविधाएं मिलें जिसका वह हकदार है।”
बुन्देलखण्ड सेवा संस्थान के कार्यक्रम समन्वयक अमरदीप वमोनिया ने बताया कि पिछले वर्षो से अब तक पुलिस व प्रशासन के सहयोग से 242 बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया। यह कार्रवाई राज्य सरकार के विभिन्न विभागों और एजेंसियों की ओर से जून को बाल मजदूरी के खिलाफ कार्रवाई माह या ‘एक्शन मंथ’ के रूप में मनाने के बाबत जारी अधिसूचना व निर्देशों के तहत की गई। बच्चों को मुक्त कराने के बाद जिम्मेदार तत्वों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है और पीड़ित बच्चों को पुनर्वास, मुआवजा व अन्य सुविधाएं दिलाने की प्रक्रिया जारी है। बुन्देलखण्ड सेवा संस्थान ने जिले में बाल मजदूरी के खिलाफ जनजागरूकता अभियान भी चलाए जिसमें विभिन्न सरकारी विभागों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के अफसरों, सामुदायिक नेताओं और ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। बुन्देलखण्ड सेवा संस्थान बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) का सहयोगी संगठन है। जून महीने को बाल श्रम के खिलाफ ‘एक्शन मंथ’ के तौर पर मनाया जाता है और चूंकि बाल दुर्व्यापार यानी बच्चों की ट्रैफिकिंग बाल मजदूरी का मुख्य कारण है, इसलिए नागरिक समाज संगठन इस दौरान पुलिस व प्रशासन के साथ मिलकर दुर्व्यापारियों और उनके गठजोड़ की शिनाख्त के लिए कड़ी नजर रखते हैं।

इस मौके पर न्यायपीठ बाल कल्याण समिति सदस्य हरीकृष्ण सक्सेना, वन स्टॉप सेटर प्रभारी प्रीति त्रिपाठी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के वरिष्ठ लिपिक आदिल जाफरी, सपोर्ट पर्सन शिवानी पोरवाल, पवन गौतम एवं समस्त पीएलवी अधिकार मित्र उपस्थित रहे।









