राजकीय जिला पुस्तकालय, ललितपुर में विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरणादायक व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 80 से 90 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. सौरभ देवलिया ने बच्चों को जीवन में अनुशासन, ध्यान, आत्मनियंत्रण और लक्ष्य के महत्व के बारे में प्रेरित किया।
व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों को समझाया गया कि आज की सबसे बड़ी समस्या “भटकता हुआ मन” है। यदि विद्यार्थी केवल मन के अनुसार चलेंगे तो लक्ष्य से दूर हो जाएंगे। बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा गया — “मन के पीछे डंडा लेकर चलो, मन के हिसाब से नहीं।”
कार्यक्रम में बच्चों को एकाग्रता बढ़ाने की सरल तकनीकें भी बताई गईं। समझाया गया कि पढ़ाई करो तो केवल पढ़ाई करो, बात करो तो केवल सामने वाले को सुनो, चलो तो अपने कदम महसूस करो और हर कार्य पूरे ध्यान से करो।
विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया गया कि वे रोज स्वयं से पूछें — “जो मैं अभी कर रहा हूँ, क्या वह मुझे मेरे सपने तक ले जाएगा?”
कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ व्याख्यान सुना तथा इसे अपने जीवन के लिए अत्यंत प्रेरणादायक बताया।
इस अवसर पर राजकीय जिला पुस्तकालय, ललितपुर के कमलेश कुमार (लाइब्रेरियन), रोशनी पाल (सहायक लाइब्रेरियन) एवं सोनू सिंह (कंप्यूटर ऑपरेटर) का विशेष सहयोग रहा।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास, अनुशासन और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा जगाना रहा।
अंत में डॉ. सौरभ देवलिया ने बच्चों को संदेश दिया — “सपने बड़े रखो, ध्यान मजबूत रखो और मेहनत से दोस्ती कर लो, सफलता एक दिन जरूर मिलेगी।”









