टीकमगढ़ नया मंदिर में परम पूज्य गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री विकौशल सागर जी महाराज के सानिध्य में चल रहे “श्रमण संस्कृति संस्कार शिविर

धर्म प्रभावना समिति का अध्यक्ष नरेंद्र जनता ने जानकारी देते हुए बताया कि आज मुनि श्री के प्रवचन में मुनि श्री ने कहा
“मनुष्य कौन है” विषय पर अत्यंत प्रेरणादायक उद्बोधन प्रदान किया।
मुनि श्री ने बताया कि वास्तविक मनुष्य वही है जो मननशील हो, अर्थात प्रत्येक कार्य को सोच-समझकर करने वाला हो। जो बुद्धि सहित हो तथा अपनी बुद्धि के सदुपयोग से कार्यों को नई दिशा और नया स्वरूप देने में समर्थ हो। मनुष्य निरंतर नई-नई खोज करने की क्षमता रखता है। वह केवल बुद्धिजीवी ही नहीं, बल्कि बुद्धि का कुशल एवं निपुण प्रयोग करने वाला भी है।
उन्होंने दूसरी परिभाषा देते हुए कहा कि “जो मनु की संतान है वही मनुष्य है।” यद्यपि गाय, भैंस, बकरी, कुत्ता एवं पक्षियों आदि में भी मन पाया जाता है, किन्तु मनुष्य की क्षमता अधिक विकसित होने के कारण वह अनेक विकासशील कार्य कर सकता है।
मुनि श्री ने कहा कि आज पंखा, कूलर, एसी, हवाई जहाज जैसी आधुनिक सुविधाएँ मनुष्य की मननशीलता और बुद्धि का ही परिणाम हैं। किन्तु यही बुद्धि सदुपयोग और दुरुपयोग दोनों कर सकती है। आज एटम बम जैसे विनाशकारी साधनों का निर्माण भी मनुष्य की बुद्धि का परिणाम है, परंतु वह बुद्धि का दुरुपयोग है।
अंत में मुनि श्री ने संदेश दिया कि प्रत्येक मनुष्य को अपनी बुद्धि का प्रयोग अच्छे एवं विकासशील कार्यों में करना चाहिए, जिससे पूरे देश और राष्ट्र का कल्याण एवं विकास हो सके।
जनता जी ने बताया कि
दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर के तत्वावधान में आयोजित श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर नया मंदिर टीकमगढ़ में आयोजित है जिसमें 2 वर्ष से लेकर 85 वर्ष तक के लगभग 600 शिविरार्थी धर्म, शिक्षा और संस्कार के माध्यम से सुशोभित हो रहे हैं जिसमें शिविर के अंतर्गत बड़े-बड़े विद्वानों के माध्यम से समाज को नई-नई दिशाएं प्रदान की जा रही है बाल ब्रह्मचारी जय निशांत भैया जी के माध्यम से आज बच्चों के लिए पूजन प्रशिक्षण तथा सभी शिविरार्थी बंधुओं के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया गया एवं वरिष्ठ नागरिकों के लिए सम्यक दर्शन कैसे प्राप्त हो यह विधि बताई जा रही है तथा जीवन उन्नत कैसे करें इस प्रकार से मार्गदर्शन प्रदान किया गया तथा सांगानेर से पधारे विद्वानों के माध्यम से सभी श्रावकों को संस्कारों की शिक्षाएं प्रदान की जा रही है तथा विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं के माध्यम से शिविरार्थी बंधुओं का चौमुखी विकास शिविर के माध्यम से हो रहा है 23.5.26 को सभी की परीक्षा होगी और 108 विकौशल सागर महाराज द्वारा पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा
यह समस्त कार्यक्रम समस्त दिगंबर जैन समाज द्वारा कराया जा रहा है जिसमें प्रमुख रूप से विकास सकेरा हनी जैन संतोष जैन साकेरा, विनी जैन, वैभव जैन, सार्थक जनता ,प्रदीप कारी ज्ञानचंद पठा शैलेंद्र चौधरी डॉक्टर सुनील जैन निर्मल तरंग
प्रमुख रूप से कार्यक्रम की शोभा बढ़ा रहे हैं








