डॉ. एन.के. बाजपेई, निदेशक प्रसार: कृषक बंधु मृदा परीक्षण उपरांत संस्तुत के आधार पर संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करें

ललितपुर : बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र, ललितपुर के कृषक प्रशिक्षण सभागार में डॉ. एन. के. बाजपेई, निदेशक प्रसार की अध्यक्षता में “फसलों में उर्वरकों के संतुलित प्रयोग” विषय पर विशेष जागरूकता अभियान के आयोजन किया गया। निदेशक प्रसार ने आह्वान किया कि हर किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच करायें एवं जांच के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करें। जिस प्रकार हमारे भोजन की थाली में सभी तत्वों का संतुलन आवश्यक है उसी प्रकार पौधों के भोजन में सभी तत्वों का संतुलन आवश्यक है। आवश्यकता से अधिक उर्वरकों के प्रयोग से खेती की लागत बढ़ती है। मृदा की उर्वरता स्तर में गिरावट आती है। मृदा में पौधों के लिए आवश्यक सभी 17 पोषक तत्वों जैसे नत्रजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर, कैल्शियम, मैग्नीशियम आदि की संतुलित मात्रा प्रयोग के लिए डीएपी और यूरिया की कम से कम प्रयोग के साथ दूसरे स्रोत जैसे पशुओं की सड़ी खाद, केंचुआ खाद, हरी खाद, नाडेप खाद, जैव उर्वरक, एनपीके, तरल उर्वरक का भी प्रयोग करें। निदेशक प्रसार ने कृषक बंधुओं को कृषि विज्ञान केन्द्र से जुड़कर लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित किया। डॉ. मुकेश चंद, वरिष्ठ वैज्ञानिक और अध्यक्ष ने तकनीकी जानकारी में बताया कि जिला ललितपुर के कृषक गत वर्ष (जनवरी से दिसंबर 2025) आवश्यकता से अधिक डीएपी/टीएसपी/एमएपी का 30073 मीट्रिक टन प्रयोग किया था। मृदा में यूरिया और डीएपी की आवश्यकता से अधिक और असंतुलित प्रयोग से मृदा में पोषक तत्वों का असंतुलन, मृदा उर्वरता में क्षीणता और उर्वरक उपयोग शमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कृषक बंधु यूरिया और डीएपी की असंतुलित प्रयोग की अपेक्षा मृदा परीक्षण, फसल की आवश्यकता और वैज्ञानिक संस्तुत के आधार पर एनपीके कॉम्प्लेक्स और एसएसपी उर्वरक का संतुलित प्रयोग कर अधिक लाभ उठा सकते हैं। कृषक बंधु हरी खाद (ढैंचा), जैव उर्वरक (राइजोबियम, पीएसबी), गोबर की सड़ी खाद, केंचुआ खाद, नाडेप खाद और सूक्ष्म पोषक तत्वों के प्रयोग से भी अच्छी उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। डॉ. दिनेश तिवारी, विषय वस्तु विशेषज्ञ-सस्य विज्ञान/ नोडल ऑफिसर – उर्वरकों का संतुलित प्रयोग जागरूकता अभियान ने बताया कि कृषक बंधु पौधों को दिये जाने वाले उर्वरकों का पौधों में क्या कार्य है, इसकी जानकारी पहले करें एवं उर्वरकों का प्रयोग सही मात्रा में सही समय पर और सही तरीके से ही करें। जिससे उनके धन का उचित उपयोग होगा और मिट्टी की उर्वरता के साथ वातावरण व मिट्टी का पर्यावरण भी स्वास्थ्य रहेगा। इस अवसर पर कृषकों को पशुओं के गोबर, मूत्र, बिछावन और चारा अवशेष से गुणवत्तायुक्त खाद बनाकर खेत में डालने के लिए जागरूक किया गया। जैविक खेती और प्राकृतिक खेती करने के लिए भी प्रेरित किया गया। डॉ. अनुज कुमार गौतम, विषय वस्तु विशेषज्ञ-पशु पालन और डॉ. सरिता देवी, विषय वस्तु विशेषज्ञ-गृह विज्ञान ने भी कृषकों को मृदा में और फसलों को संतुलित उर्वरकों के प्रयोग के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में ककरूआ, बम्हौरीकला, महेशपुरा और ऐरा के श्री विजय सिंह राजपूत, श्री हरनाम सिंह पटेल, श्री संजय कुमार सिंह, श्री राम चरन सहित 40 से अधिक प्रगतिशील कृषकों ने प्रतिभाग किया।

▶️पत्रकार रामजी तिवारी मड़ावरा 

▶️संपादक स्वराज भास्कर 

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रामजी तिवारी मड़ावरा

चीफ एडिटर – स्वराज भास्कर

रामजी तिवारी मड़ावरा एक अनुभवी और निष्पक्ष पत्रकार हैं, जो उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश की जमीनी खबरों को सटीकता और विश्वसनीयता के साथ प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्षों के अनुभव के साथ, उनका उद्देश्य समाज तक सच्ची, निष्पक्ष और प्रभावशाली खबरें पहुंचाना है।

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