नाराहट/जनपद ललितपुर के कस्बे नाराहट में जन्मे जाने माने कवि रवि कुशवाहा ने बरगी बांध जबलपुर हादसे की हृदयविदारक घटना पर जो पंक्तियां लिखी उन पंक्तियों ने लोगों का दिल झकझोर दिया।

30 अप्रैल 2026 की शाम जबलपुर स्थित बरगी डैम में आई प्राकृतिक आपदा ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। तेज आंधी और भारी बारिश के कारण पर्यटकों से भरा एक क्रूज असंतुलित होकर जलमग्न हो गया। इस भीषण हादसे में कई जिंदगियां काल के गाल में समा गईं।ममता की अमर तस्वीर ने दी कविता को जन्म रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बचाव दल के सामने एक ऐसी मर्म स्पर्शी तस्वीर आई, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। पानी की गहराई में एक मां का शव मिला, जिसने मरते दम तक अपने कलेजे के टुकड़े (बच्चे) को अपने सीने से अलग नहीं होने दिया था। मां और बच्चे का यह अटूट बंधन देख रेस्क्यू टीम भी फफक पड़ी।इस मार्मिक दृश्य ने ललितपुर के युवा कवि रवि कुशवाहा के हृदय को झकझोर दिया।जिसके बाद उनके कलम से कुछ ऐसी पंक्तियां निकलीं जो अब सोशल मीडिया पर संवेदना का प्रतीक बन चुकी हैं।माँ ने ख़ुद ज़मीं पर प्यार का दरिया बहाया था।कलेजे के उस टुकड़े को कलेजे से लगाया था।बिछड़कर भी न वह बिछड़ी, रही वह साथ बेटे के,लगा जैसे उसे लोरी सुनाकर ही सुलाया था।सोशल मीडिया पर उमड़ा जन सैलाबइन पंक्तियों में छिपी संवेदना और मां के बलिदान की व्याख्या ने देश के लाखों लोगों के दिलों को छुआ है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर यह कविता तेजी से वायरल हो रही है। लोग इन पंक्तियों के माध्यम से हादसे के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। कवि रवि कुशवाहा की ये पंक्तियां न केवल एक दुर्घटना का वृत्तांत हैं, बल्कि मां की कभी न हारने वाली ममता का जीवंत दस्तावेज बन गई हैं।
▶️पत्रकार रामजी तिवारी मड़ावरा
▶️संपादक स्वराज भास्कर
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