औरंगाबाद पुष्पगिरी सोनकच्छ। पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज ने के सानिध्य में अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज ससंघ पुष्पगिरी में वर्षायोग हेतु विराजमान हैं उनके सानिध्य में वहां विभिन्न धार्मिक कार्योंकम संपन्न हो रहें हैं उसी श्रुंखला में आज सुबह उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि। जिन्दगी के रंग मंच पर, कोई भी कलाकार कमजोर नहीं होता। यहाँ हर किसी को नाटक करना पड़ता है। वैज्ञानिक ढूंढ रहे हैं कि मंगल पर जीवन है या नहीं। और हम ढूंढ रहे हैं कि आपके जीवन में मंगल है कि नहीं। इसलिए मिट्टी के दीपक सा है ये जीवन — तेल खतम, खेल खतम।

जीवन के दस सच —
माँ के सिवा कोई वफादार नहीं।
गरीब का कोई दोस्त नहीं।
आज भी लोग अच्छी सोच को नहीं, अच्छी सूरत को तरजीह देते हैं।
इज्जत तो सिर्फ पैसों की है, इंसान की नहीँ।
जो जितना अपना खास होगा, वो शख़्स उतना ही दुःख देगा।
आप भारत की भूमि पर मेहमान है, मालिक नहीं।
अहो आश्चर्य! सब जोड़ने में लगे हुये हैं, छोड़़कर मरने के लिये।
उतना बोलो जुबान से, जितना सुन सको कान से।
सबसे गहरा शब्द है — कुछ नहीं, जिसे हर कोई नहीं समझ सकता।
बिना रुलाए तो प्याज भी नहीं कटती..फिर तो ये जिन्दगी है बाबू — ऐसे कैसे कट जाएगी…??? ऐसी जानकारी प्रचार प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद ने दी है









