मौन, मधुर वाणी और गुरु भक्ति से ही जीवन बनता है श्रेष्ठ : मुनि श्री विकौशल सागर महाराज

महरौनी,ललितपुर।
श्री अजित नाथ धाम पर मुनिश्री विकौशल सागर के सानिध्य में 48 दिवसीय भक्तामर विधान चल रहा है।जिसमें प्रातःकालीन वेला में जिन अभिषेक शांतिधारा पूजन किया जा रहा है ।
जैन मुनि श्री विकौशल सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचनों में कहा कि मनुष्य के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी शक्ति उसका मौन, मधुर वचन और गुरु भक्ति है। उन्होंने कहा कि “मौन से अनेक कमियों को ढका जा सकता है, इसलिए अनावश्यक बोलने की अपेक्षा मौन रहना अधिक श्रेष्ठ है।” मौन व्यक्ति को आत्मचिंतन, संयम और विवेक की ओर ले जाता है।
मुनिश्री ने कहा कि जो हमारे हितैषी और सच्चे मित्र हैं, वही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। ऐसे संबंधों को प्रेम, विश्वास और सद्भाव से निभाना चाहिए।
उन्होंने वाणी की महिमा बताते हुए कहा कि मनुष्य अपनी मधुर वाणी से पूरे संसार को अपना बना सकता है। कटु वचन संबंधों को तोड़ते हैं, जबकि मधुर वाणी हृदयों को जोड़ती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को “पहले तौले, फिर बोले” के सिद्धांत को अपनाना चाहिए। सोच-समझकर बोले गए शब्द जीवनभर सम्मान दिलाते हैं।
मुनिश्री ने आगे कहा कि देव, शास्त्र और गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा एवं भक्ति मनुष्य के जीवन को प्रकाशित कर देती है। गुरु कृपा और धर्म के संस्कारों से अज्ञानी व्यक्ति भी ज्ञानवान एवं विवेकशील बन सकता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से धर्म, संयम, सदाचार और मधुर व्यवहार को जीवन में उतारने का आह्वान किया।

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रामजी तिवारी मड़ावरा

चीफ एडिटर – स्वराज भास्कर

रामजी तिवारी मड़ावरा एक अनुभवी और निष्पक्ष पत्रकार हैं, जो उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश की जमीनी खबरों को सटीकता और विश्वसनीयता के साथ प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्षों के अनुभव के साथ, उनका उद्देश्य समाज तक सच्ची, निष्पक्ष और प्रभावशाली खबरें पहुंचाना है।

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