*कोलकाता,१९ जुलाई २०२६: पार्श्वनाथ भगवान के असीम आशीर्वाद और समस्त जैन समाज के सामूहिक समर्पण से आज दिनांक १९ जुलाई २०२६ को श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन उपवन मंदिर जी के जीर्णोद्धार (पवित्र नवीनीकरण) और प्रभु के मूलवेदी (गर्भगृह) पर पुनः स्थापन का भव्य कार्य सफलता पूर्वक संपन्न हो गया है। यह ऐतिहासिक मील का पत्थर जैन समाज के आध्यात्मिक केंद्र के पुनरुद्धार का प्रतीक है, जिसने सभी श्रद्धालुओं को असीम आनंद और दिव्य कृपा से सराबोर कर दिया है।*

*सांस्कृतिक और आध्यात्मिक वास्तुकला का संरक्षण*
*विगत कई महीनों के अथक प्रयासों के बाद, मंदिर का अत्यंत सूक्ष्मता और शुचिता के साथ जीर्णोद्धार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों के लिए मंदिर की प्राचीन पवित्रता को अक्षुण्ण रखते हुए इसकी वास्तुकला को सुदृढ़ बनाना था। कुशल शिल्पकारों ने मंदिर की जटिल नक्काशी और संरचनात्मक मजबूती को वापस लाने के लिए दिन-रात परिश्रम किया। इस प्रक्रिया में मंदिर के प्रत्येक कोने को आध्यात्मिक रूप से शुद्ध किया गया है, ताकि वहां सकारात्मक ऊर्जा और दिव्य तरंगों का संचार हो सके।*
*मंत्रोच्चार और भक्तिभाव के बीच पुनः स्थापन*
*यह अलौकिक अनुष्ठान श्रद्धेय आचार्य १०८ श्री वसुनंदी जी महामुनिराज ससंघ के पावन सान्निध्य और प्रतिष्ठित प्रतिष्ठाचार्य आनंद शास्त्री जी के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। संपूर्ण परिसर शक्तिशाली मंत्रों, हवन और पवित्र अभिषेक की मंगल ध्वनियों से गुंजायमान रहा। वह क्षण अत्यंत भावुक और आनंदमयी था जब अरिहंत भगवान की प्रतिमा जी को पूरे आदर-सत्कार और विधि-विधान के साथ वापस लाकर मूलवेदी पर स्थायी रूप से विराजमान किया गया। स्थापना के उपरांत जब भव्य गर्भगृह के पट खुले, तो प्रभु की दिव्य आभा देखकर उपस्थित हर भक्त मंत्रमुग्ध हो गया।*
*सहयोगियों के प्रति आभार*
*इस महान कार्य की सफलता पर जैन समाज के प्रति आभार व्यक्त करते हुए महामंत्री श्री सुधीर जी जैन ने कहा,*
“*यह अलौकिक कार्य हमारे समाज और भक्तों के अटूट सहयोग के बिना संभव नहीं था। हम उन सभी दानदाताओं, समर्पित स्वयंसेवकों, समिति के सदस्यों और शिल्पकारों के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जिन्होंने दिन-रात एक करके इस सपने को हकीकत में बदला है। मंदिर की सेवा में योगदान देना वास्तव में आंतरिक शांति को बहाल करने जैसा है।”*
*दैनिक दर्शन और पूजा-आरती का आमंत्रण*
*नवनिर्मित और भव्य मंदिर के द्वार अब सभी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। प्रभु अपनी मूलवेदी पर पूरी महिमा के साथ विराजमान हैं। मंदिर समिति ने समस्त गुरुभक्तों और धर्मप्राण जनता को सपरिवार मंदिर आने, दैनिक पूजा-आरती में सम्मिलित होने और इस नई दिव्य ऊर्जा का प्रत्यक्ष अनुभव करने के लिए सादर आमंत्रित किया है।*
*जय जिनेन्द्र!*
*सुधीर जैन*
*महामंत्री, श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन उपवन मंदिर समिति बेलगछिया*








