महरौनी,ललितपुर।
आचार्य श्री विरागसागर महाराज एवं आचार्य श्री विशुद्धसागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनिश्री विकौशल सागर महाराज का श्री अजितधाम दिगम्बर जैन मंदिर, महरौनी में मंगल प्रवेश रविवार को भक्ति, श्रद्धा और उल्लास के साथ हुआ। नगर में गाजे-बाजे, मंगल ध्वनि एवं भव्य शोभायात्रा के साथ उनका ऐतिहासिक स्वागत किया गया। नगर के प्रमुख मार्गों से निकली शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए तथा जगह-जगह पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया।
मंदिर परिसर में दिगम्बर जैन पंचायत समिति एवं सकल दिगम्बर जैन समाज ने मुनिश्री को श्रीफल अर्पित कर वर्ष 2026 के चतुर्मास हेतु महरौनी में विराजमान रहने का निवेदन किया। चतुर्मास महरौनी को मिलने की घोषणा से समाज में हर्ष की लहर दौड़ गई और पूरा परिसर भगवान महावीर एवं जिनेन्द्र देव के जयघोष से गूंज उठा।
अपने मंगल प्रवचन में मुनिश्री विकौशल सागर महाराज ने कहा कि सच्चा धर्म आत्मशुद्धि, संयम, क्षमा, करुणा और सदाचार में निहित है। उन्होंने राग-द्वेष का त्याग कर आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने का संदेश देते हुए धर्ममय जीवन को वास्तविक सुख एवं शांति का आधार बताया।
इस अवसर पर दिगम्बर जैन पंचायत समिति, महिला समिति, महिला मंडल, युवक-युवती मंडल, सकल दिगम्बर जैन समाज के पदाधिकारी, वरिष्ठजन एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में सभी समितियों एवं समाजजनों का सराहनीय सहयोग रहा।









