गंगासागर की पावन धरती पर ऐतिहासिक चमत्कार: मात्र सात दिनों में भव्य जैन चैत्यालय की स्थापना और वेदी प्रतिष्ठा संपन्न

गंगासागर (पश्चिम बंगाल), 19 जुलाई 2026:
गंगासागर की पवित्र भूमि पर एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक धार्मिक प्रसंग अत्यंत हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। श्री दिगंबर जैन गंगासागर पार्श्वनाथ तीर्थ विकास समिति एवं श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा (पश्चिम बंगाल) के संयुक्त तत्वावधान में, मात्र 7 दिनों के भीतर एक भव्य जैन चैत्यालय (मंदिर) का निर्माण कर भगवान की वेदी प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक कार्य संपन्न किया गया।

यह आयोजन परम पूज्य आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी महाराज के ससंघ शुभाशीर्वाद से और पं.आलोक कुमार जैन शास्त्री (बड़ामलहरा) के कुशल निर्देशन में 18-19 जुलाई 2026 को आयोजित किया गया।

आचार्य श्री के मुखारविंद से निकली वाणी हुई अक्षरशः सिद्ध
इस चमत्कारिक घटनाक्रम की शुरुआत कुछ समय पूर्व हुई जब श्री राजकुमार जी सेठी महामंत्री तीर्थ संरक्षणी महासभा,आसनसोल के महामंत्री श्री विनीत जी पाटनी एवं तीर्थ संरक्षिणी महासभा (पश्चिम बंगाल) के प्रचार मंत्री श्री विजय जी सरावगी ने गंगासागर में 4-5-6 दिसंबर 2026 को होने वाले पंचकल्याणक के लिए आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज से आशीर्वाद लिया था। उस समय आचार्य श्री ने मार्गदर्शन देते हुए निर्देश दिया था कि “गंगासागर में सर्वप्रथम एक चैत्यालय बनवाकर भगवान विराजमान किए जाएं और एक पुजारी की व्यवस्था हो, जो पोंड्रक जैन समाज के लोगों को जैन पद्धति से पूजन करा सके।”

संयोगों का अद्भुत संगम और ईश्वरीय चमत्कार
आचार्य श्री की प्रेरणा मिलते ही अद्भुत संयोग बनने शुरू हुए:

मूर्तियों की उपलब्धता: उसी समय व्हाट्सएप पर श्री विनोद कुमार सेठी (दीमापुर) का संदेश आया कि वे गंगासागर में तीन मूर्तियाँ विराजमान करना चाहते हैं। ये तीनों प्रतिमाएँ आर्यिका गणिनी पूजनीय ज्ञानमती माताजी द्वारा अयोध्या में जून माह में प्रतिष्ठित की गई थीं और वर्तमान में शिखर जी में विराजमान थीं।

त्वरित परिवहन: शिखर जी से मूर्तियाँ लाने के लिए जब कार्यकर्ता की आवश्यकता हुई,तो कोलकाता से श्री पवन जी ठोलिया शिखर जी गए हुये थे पवन जी तीनों प्रतिमाओं को आदरपूर्वक कोलकाता लेकर आए।

अभिषेक व शांतिधारा: कोलकाता के बेलगाछिया मंदिर में तीनों प्रतिमाओं को विराजमान कर तीन दिनों तक भव्य अभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन किया गया।

मात्र 7 दिनों के भीतर चैत्यालय का निर्माण, प्रतिमाओं की सहज उपलब्धता और उनका आगमन किसी चमत्कार से कम नहीं है। यह केवल एक चैत्यालय की स्थापना नहीं, बल्कि जैन धर्म, संस्कृति और जिन शासन की गौरवपूर्ण पुनर्स्थापना का ऐतिहासिक क्षण है।

पुण्यार्जक परिवारों का सराहनीय सहयोग
इस पावन कार्य में देश-विदेश के अनेक जैन परिवारों ने बढ़-चढ़कर अपनी सेवाएँ और सामग्रियाँ अर्पित कर पुण्य लाभ कमाया:

ध्वजारोहण कर्ता: श्री नरेंद्र कुमार राजकुमारी पांड्या (सुजानगढ़/कोलकाता)

वेदी प्रदानकर्ता:श्री फूलचंद विनोद कुमार, दिवस,आनंद सेठी (दीमापुर/कोलकाता)

वेदी स्थापनाकर्ता: श्री अशोक सुमन चूड़ीवाल (बरपेटा रोड,असम)

सौधर्म इंद्र: श्री अमित-विनीता सेठी (कोलकाता)

यज्ञनायक: श्री कमल ललिता पाटनी (वर्धमान)

प्रतिमा विराजमानकर्ता:

भगवान पद्मप्रभ: श्री अजीतकुमार लीलादेवी झांझरी (नलबाड़ी, असम)

मूलनायक भगवान मल्लिनाथ: श्री ओमप्रकाश प्रभा सेठी (गुवाहाटी)

भगवान आदिनाथ: श्रीमती बेला सुरेश, अरिहंत, साहिल छाबड़ा (गुवाहाटी, असम)

छत्र, भामंडल व सिंहासन प्रदाता: श्रीमती इंद्रा देवी गंगवाल (दीमापुर), श्रीमती उषा, संतोष, शोभा, स्वाती जैन (पूर्वोत्तर शाखा), एवं श्रीमती कुसुम देवी पाटनी (गुवाहाटी)

पांडुक शिला: श्रीमती मंजू देवी पहाड़िया (गुवाहाटी)

पंचमेरु: श्री अमरचंद विजय संजय सेठी (हावड़ा)

अष्ट मंगल प्रदाता: श्रीमती ज्ञाना देवी सेठी (कोलकाता)

अष्ट प्रातिहार्य प्रदाता: श्रीमती गुंजा चूड़ीवाल (बरपेटा रोड)

अलमारी प्रदाता: श्री अशोक ममता पांड्या (जयपुर)

चौकी, कुर्सी व मेज प्रदाता: श्री रमेश अंजना काला (गुवाहाटी) एवं श्री राजेश जूली पाटनी (गौरिपुर वाले – बड़ी चौकी)

पूजन सामग्री: श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन महिला महासभा (पश्चिम बंगाल)

महाघंटा प्रदाता: श्रीमती रेखा जैन (कोलकाता)

श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा (पश्चिम बंगाल शाखा) इस अलौकिक आयोजन में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी पुण्यार्जकों, समाजसेवियों और श्रद्धालुओं की हृदय से भूरि-भूरि प्रशंसा और हार्दिक अनुमोदना करती है। यह दिव्य संयोग सभी के लिए सदैव अविस्मरणीय, प्रेरणादायक और गुरु-कृपा की महिमा का साक्षात प्रमाण रहेगा।

भवदीय,
राजकुमार जैन सेठी
राष्ट्रीय महामंत्री (तीर्थ संरक्षिणी महासभा)

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रामजी तिवारी मड़ावरा

चीफ एडिटर – स्वराज भास्कर

रामजी तिवारी मड़ावरा एक अनुभवी और निष्पक्ष पत्रकार हैं, जो उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश की जमीनी खबरों को सटीकता और विश्वसनीयता के साथ प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्षों के अनुभव के साथ, उनका उद्देश्य समाज तक सच्ची, निष्पक्ष और प्रभावशाली खबरें पहुंचाना है।

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