बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र, ललितपुर के केंद्राध्यक्ष डॉ. मुकेश चंद के नेतृत्व में समूहबद्ध अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन-तिलहन योजना अंतर्गत विकासखंड बार के ग्राम दसरारा और भैलोनीसुवा, विकासखंड तालबेहट के ग्राम राजपुरा और विकासखंड बिरधा के ग्राम पिपरियाबंशा के 200 कृषक/ कृषक महिलाओं को प्रति कृषक प्रति एकड़ की दर तिल (प्रजाति उन्नत रामा/पी.सी.यू.एस. 18-1) का 2 किलोग्राम बीज उपलब्ध कराया गया। डॉ. दिनेश तिवारी, विषय वस्तु विशेषज्ञ-सस्य विज्ञान/नोडल अधिकारी -समूहबद्ध अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन तिलहन द्वारा कृषकों को तिल की उन्नत कृषगत क्रियाओं जैसे खेत की तैयारी, बीज की बुवाई तकनीक, पोषक तत्वों का प्रबंधन, खरपतवार प्रबंधन, कीट और बीमारियों का नियंत्रण आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। डॉ. तिवारी ने बताया कि समूहबद्ध अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन-तिलहन योजना के माध्यम से जनपद ललितपुर में तिल का क्षेत्रफल, उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने के लिए कृषक बंधु को तिल की नवीनतम प्रजाति उन्नत रामा/ पी.सी.यू.एस. 18-1 उपलब्ध कराया गया है। तिल की प्रजाति उन्नत रामा (PCUS 18-1) भारत सरकार द्वारा 2024 में विकसित गई है। यह विशेष रूप से मध्य प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और तमिलनाडु में खेती के लिए संस्तुत की गई है। ललितपुर की मृदा और जलवायु के लिए अनुकूल प्रजाति है। यह प्रजाति 80-90 दिन में पककर तैयार हो जाती है। अनुकूल परिस्थिति में इसकी औसत उत्पादन क्षमता 9.51 कुंटल/ हैक्टेयर है। इसमें 46.35 प्रतिशत तेल होता है। तिल की फसल में मुख्य रूप से लगने बीमारियों जैसे मैक्रोफोमिना स्टेम/ रूट रॉट, अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट, सर्कोस्पोरा लीफ स्पॉट और कॉमन पेस्ट्स जैसे लीफ वेबर और कैप्सूल बोरर के प्रति मध्यम अवरोधी प्रजाति है। कृषक बन्धुओं को कृषि विज्ञान केन्द्र, ललितपुर से जुड़कर समय समय पर आवश्यकता अनुसार वैज्ञानिक और तकनीकी जानकारी लेते रहने के लिए भी प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में डॉ. अनुज कुमार गौतम, विषय वस्तु विशेषज्ञ- पशुपालन भी उपस्थित रहे।









