मनरेगा कार्मिकों की उपेक्षा से वीबीजी योजना की शुरुआत फीकी, पहले दिन ही धरने पर बैठे ग्राम रोजगार सेवक

महरौनी, ललितपुर।
मनरेगा का नाम बदलकर शुरू की गई नई वीबीजी योजना की शुरुआत पहले ही दिन फीकी नजर आई। अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदेशभर के ग्राम रोजगार सेवक एवं अन्य मनरेगा कार्मिक धरने पर बैठ गए, जिससे योजना का संचालन भी प्रभावित हो रहा है।
ग्राम रोजगार सेवकों का कहना है कि नई योजना में उनके हितों की अनदेखी की गई है। मजदूरों की दैनिक मजदूरी बढ़ाकर लगभग 300 रुपये कर दी गई है, जबकि रोजगार सेवकों का मासिक मानदेय अब भी करीब 7,000 रुपये ही है। साथ ही, योजना को पूरी तरह डिजिटल बनाए जाने के कारण उन्हें महंगा स्मार्टफोन रखने की मजबूरी है, जबकि मानदेय में कोई वृद्धि नहीं की गई।
कार्मिकों का आरोप है कि उन्हें न मानव संसाधन नीति का लाभ मिल रहा है और न ही बढ़ती महंगाई के अनुरूप मानदेय। उनका कहना है कि वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता तो आज उन्हें अपनी मांगों के लिए धरना देने को मजबूर नहीं होना पड़ता।

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रामजी तिवारी मड़ावरा

चीफ एडिटर – स्वराज भास्कर

रामजी तिवारी मड़ावरा एक अनुभवी और निष्पक्ष पत्रकार हैं, जो उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश की जमीनी खबरों को सटीकता और विश्वसनीयता के साथ प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्षों के अनुभव के साथ, उनका उद्देश्य समाज तक सच्ची, निष्पक्ष और प्रभावशाली खबरें पहुंचाना है।

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