ललितपुर। अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान (रजि.) युवा प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित तीर्थंकर ऋषभदेव राष्ट्रीय आलेख प्रतियोगिता के विजेताओं का पुरस्कार वितरण समारोह विगत दिनों कोलकाता में प्राकृत भाषा चक्रवर्ती आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में संपन्न हुआ।
प्रतियोगिता के वरिष्ठ वर्ग में ललितपुर के युवा मनीषी एवं साहित्यकार डॉ. सुनील जैन ‘संचय’ ने प्रथम स्थान प्राप्त कर जनपद एवं समूचे बुंदेलखंड का गौरव बढ़ाया। उन्हें पुरस्कार राशि, प्रमाण पत्र, प्रशस्ति-पत्र तथा अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
पुरस्कार वितरण भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान (रजि.) युवा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष गौरव जैन (दिल्ली), महामंत्री अंकुर जैन (पुणे), मुख्य संयोजक एवं कोषाध्यक्ष अंशुल जैन (दिल्ली) तथा सह-कोषाध्यक्ष अक्षय जैन द्वारा किया गया। उल्लेखनीय है कि इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देशभर से लगभग चार सौ प्रविष्टियाँ प्राप्त हुई थीं। उच्च स्तरीय निर्णायक मंडल का गठन किया गया था। विजेताओं की घोषणा आर्यिका श्री वर्धस्वनंदिनी माताजी ने की।
इस अवसर पर आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि तीर्थंकर ऋषभदेव भारतीय संस्कृति के आद्य प्रवर्तक एवं मानव सभ्यता के महान पथप्रदर्शक हैं। वेदों, उपनिषदों और पुराणों में भी उनके गौरवपूर्ण उल्लेख मिलते हैं। उन्होंने मानव समाज को कृषि, लेखन, व्यापार, शिल्प, युद्धकला तथा विविध विद्याओं का ज्ञान प्रदान कर सभ्यता के विकास का मार्ग प्रशस्त किया। प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव के ज्येष्ठ पुत्र भरत के नाम पर ही यह राष्ट्र ‘भारतवर्ष’ कहलाया।
आचार्यश्री ने प्रतियोगिता के सभी विजेताओं एवं आयोजक संस्था को मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए साहित्य एवं संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन हेतु ऐसे आयोजनों को अत्यंत उपयोगी बताया।
डॉ. सुनील जैन ‘संचय’ की इस उपलब्धि पर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं साहित्यिक संस्थाओं, विद्वानों, श्रेष्ठीजनों, शिक्षकों, इष्टमित्रों तथा शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित की हैं।









