मुनिश्री विकौशल सागर जी महाराज के सानिध्य में गूंजी जिनवाणी की महिमा, भक्तिमय वातावरण में हुआ भव्य आयोजन

महरौनी,ललितपुर।
श्रुत पंचमी के पावन अवसर पर श्री 1008 अजितनाथ धाम दिगम्बर जैन मंदिर, महरौनी में मुनिश्री विकौशल सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में श्री श्रुत ज्ञान वर्धक विधान श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ संपन्न हुआ। प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरा वातावरण धर्ममय बना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण, अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ हुआ। विधानाचार्य बा. ब्र. पारस भैया जी के निर्देशन में संगीतमय वातावरण में विधान सम्पन्न कराया गया।
विधान में वीरेंद्र डोगरया को सौधर्म इन्द्र बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जबकि प्रशन्न सिंघई, नितिन सतभैया, अनिल मिठया, अनिल सिलौनया, श्रीनिवास कठरया एवं डॉ. शतेन्द्र मलैया इन्द्र बने। सभी इन्द्रों ने विधिवत मंगल कलश स्थापना कर धर्म प्रभावना में सहभागिता निभाई।
शास्त्र विराजमान कराने का सौभाग्य दिगम्बर जैन पंचायत समिति के अध्यक्ष पवन मोदी एवं कोषाध्यक्ष अनिल सिलौनया को प्राप्त हुआ, जबकि डॉ. राजकुमार पारौल एवं नितिन शास्त्री ने शांतिधारा संपन्न कराई। इस अवसर पर निर्माण मंत्री सुनील डेवडिया के उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना भी की गई।
अपने प्रवचनों में मुनिश्री विकौशल सागर जी महाराज ने कहा कि “श्रुत ज्ञान आत्मकल्याण का वास्तविक मार्गदर्शक है। जिनवाणी के अध्ययन एवं स्वाध्याय से ही जीवन में संस्कार, सदाचार और आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।” उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को नियमित धर्मचिंतन और स्वाध्याय के लिए प्रेरित किया।
विधान के दौरान सनिल जैन एंड पार्टी द्वारा प्रस्तुत भजनों एवं संगीतमयी पूजन ने वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। अंत में विश्व शांति, धर्म प्रभावना एवं समस्त प्राणियों के कल्याण की मंगलकामना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।








