छतरपुर / घुवारा — छतरपुर जिले के मुखिया और बेहद सख्त तेवरों के लिए जाने जाने वाले कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने पूरे जिले के अतिक्रमणकारियों और भू-माफियाओं की रातों की नींद उड़ा दी है। कलेक्टर जैसवाल ने साफ, दोटूक और बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि बच्चों के भविष्य और उनके खेल के मैदान के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
मामला घुवारा के शासकीय बालक हायर सेकेंडरी स्कूल के खेल मैदान से जुड़ा है, जहां लंबे समय से कुछ रसूखदारों और भू-माफियाओं ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा था। इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने बड़ामलहरा एस डी एम (SDM) अखिल राठौर को सीधे और कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं। कलेक्टर के इन निर्देशों के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। आदेश सीधे हैं— “अतिक्रमण को तत्काल नेस्तनाबूद किया जाए!”
*कलेक्टर पार्थ जैसवाल का हंटर: “एक इंच जमीन भी नहीं छोड़ेंगे*
छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल अपनी जीरो टॉलरेंस नीति के लिए जाने जाते हैं। जैसे ही यह मामला उनके संज्ञान में आया कि घुवारा बालक हायर सेकेंडरी स्कूल का मैदान, जहां कभी बच्चे देश का भविष्य बनने के लिए पसीना बहाते थे, आज वहां अवैध निर्माण और अतिक्रमण की दीवारें खड़ी हो चुकी हैं, तो उनका पारा चढ़ गया।
कलेक्टर कार्यालय से जारी इस मौखिक और लिखित हंटर के बाद बड़ामलहरा अनुभाग का प्रशासनिक अमला पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। सूत्रों की मानें तो कलेक्टर ने स्पष्ट कर दिया है कि कार्रवाई इतनी निष्पक्ष और कड़क होनी चाहिए कि दोबारा कोई भी सरकारी या शैक्षणिक भूमि पर आंख उठाने की जुर्रत न कर सके।
जिला कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए बताया हैं कि
“स्कूल का मैदान बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए होता है, किसी की निजी जागीर या दुकानदारी चलाने के लिए नहीं। बड़ामलहरा एसडीएम को निर्देशित किया गया है कि वे तत्काल मौके पर जाएं, सीमांकन करें और जितने भी अवैध निर्माण हैं, उन्हें जमींदोज कर मैदान को पूरी तरह मुक्त कराएं।”
*बड़ामलहरा एसडीएम अखिल राठौर को ‘फ्री हैंड’, एक्शन प्लान तैयार*
कलेक्टर से हरी झंडी और सख्त निर्देश मिलने के बाद बड़ामलहरा एसडीएम अखिल राठौर पूरी तरह एक्शन में आ चुके हैं। बताया जा रहा है कि एसडीएम राठौर ने इस महा-कार्रवाई के लिए एक सीक्रेट और बेहद आक्रामक ‘एक्शन प्लान’ तैयार कर लिया है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, राजस्व विभाग, पुलिस बल और स्थानीय नगर पालिका/पंचायत की संयुक्त टीमें गठित की जा चुकी हैं। भारी मात्रा में पुलिस बल की मांग की गई है ताकि कार्रवाई के दौरान यदि कोई रसूखदार या असामाजिक तत्व व्यवधान डालने की कोशिश करे, तो उसे मौके पर ही दबोचा जा सके।
एसडीएम अखिल राठौर ने इस संबंध में अपनी तैयारियों को लेकर संकेत दे दिए हैं कि प्रशासन की जेसीबी (बुल्डोजर) और अमला किसी भी वक्त घुवारा स्कूल ग्राउंड की तरफ कूच कर सकता है। अतिक्रमणकारियों को संभलने का मौका तक नहीं दिया जाएगा।
*क्या है पूरा मामला? क्यों सुलग रही थी घुवारा में आक्रोश की चिंगारी*
घुवारा का शासकीय बालक हायर सेकेंडरी स्कूल क्षेत्र का बेहद पुराना और प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान है। इस स्कूल के पास एक विशाल खेल का मैदान (स्कूल ग्राउंड) था, जिसमें न केवल स्कूल के छात्र बल्कि क्षेत्र के सैकड़ों युवा सेना, पुलिस भर्ती की तैयारी और विभिन्न खेलों का अभ्यास करने आते थे।लेकिन, पिछले कुछ सालों में स्थानीय रसूखदारों, कुछ सफेदपोश नेताओं के संरक्षण प्राप्त लोगों और भू-माफियाओं की गिद्ध नजर इस बेशकीमती जमीन पर पड़ गई। धीरे-धीरे करके खेल मैदान के एक बड़े हिस्से पर पक्के और कच्चे निर्माण खड़े कर लिए गए। दुकानों, मकानों की आड़ में बच्चों के दौड़ने के ट्रैक को पूरी तरह बर्बाद कर दिया गया। स्थानीय नागरिकों, पालकों और जागरूक युवाओं ने कई बार इसके खिलाफ आवाज उठाई, ज्ञापन सौंपे, लेकिन हर बार रसूख के आगे कार्रवाई ठंडी पड़ जाती थी। मगर इस बार पासा पलट चुका है, क्योंकि कमान खुद कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने अपने हाथों में ले ली है।
*अतिक्रमणकारियों के खेमे में मचा हड़कंप, फोन घनघनाने लगे*
जैसे ही यह खबर घुवारा की हवाओं में तैरी कि कलेक्टर ने एसडीएम अखिल राठौर को ‘नेस्तनाबूद’ करने का अल्टीमेटम दे दिया है, वैसे ही अतिक्रमणकारियों के खेमे में हड़कंप और खलबली मच गई। जिन लोगों ने लाखों रुपये खर्च करके खेल मैदान की छाती पर अवैध इमारतें तान दी थीं, उनके चेहरों पर हवाइयां उड़ने लगी हैं।
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, कार्रवाई से बचने के लिए कई सफेदपोशों और रसूखदारों ने राजनीतिक न नब्ज टटोलनी शुरू कर दी है। बड़े-बड़े नेताओं को फोन लगाए जा रहे हैं ताकि इस बुल्डोजर एक्शन को किसी तरह रुकवाया या टाल दिया जाए। लेकिन छतरपुर के वर्तमान प्रशासनिक ढांचे के कड़े रुख को देखते हुए साफ है कि इस बार सिफारिशों की पर्चियां काम नहीं आने वाली हैं। कुछ अतिक्रमणकारी तो डर के मारे खुद ही अपना सामान समेटने और अवैध टपरिया हटाने में जुट गए है









