ललितपुर : विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर साई ज्योति संस्था द्वारा अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से विकासखंड बार के पांच ग्रामों में संचालित जल संवर्धन एवं प्राकृतिक खेती परियोजना के अंतर्गत किसानों का दिनांक 5-6 जून 2026 को दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा अंतर्गत संचालित स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र, खिरियामिस्र में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती, जैविक संसाधनों के उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जल प्रबंधन तथा लागत कम कर कृषि आय बढ़ाने की उन्नत तकनीकों से अवगत कराना था। कार्यक्रम में मा. सदर विधायक श्री रामरतन कुशवाहा जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक खेती पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। उन्होंने किसानों से कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विभाग एवं उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने का आह्वान किया। मा. विधायक ने कृषक बंधु वैज्ञानिक पद्धतियों एवं प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना सकते है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं, कृषि निवेश (बीजामृत, जीवामृत, घनजीवमृत आदि) बनाने की बिधि और कृषि में प्रयोग, फसल विविधीकरण, जल संरक्षण तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। किसानों ने प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याओं और जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने भी किसानों का मार्गदर्शन किया और प्राकृतिक खेती को भविष्य की आवश्यकता बताया। श्री हरीश जी लीड बैंक मैनेजर ने बताया कि प्राकृतिक खेती किसानों के लिए कम लागत और अधिक लाभ का मॉडल सिद्ध हो रही है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सुरक्षित खाद्यान्न उत्पादन भी संभव है। श्री सलिल अर्कवंशी जिला विकास प्रबंधक नाबार्ड ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को नवीन तकनीकों और वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन का नियमित लाभ लेना चाहिए।
उन्होंने किसानों से जल संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि सतत कृषि के लिए प्राकृतिक खेती महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। डॉ. मुकेश चंद, वरिष्ठ वैज्ञानिक और अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केन्द्र, ललितपुर ने कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत में कमी आती है तथा किसानों की आय में वृद्धि की संभावना बढ़ती है। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रयोगों को अपने खेतों में अपनाने के लिए प्रेरित किया डॉ. दिनेश तिवारी, विषय वस्तु विशेषज्ञ-सस्य विज्ञान/ मास्टर ट्रेनर-प्राकृतिक खेती ने कहा कि जैविक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियां आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करने में सहायक हैं। किसानों को इस दिशा में सकारात्मक पहल करनी चाहिए। डॉ. सरिता देवी ने प्रशिक्षण के दौरान बताया कि प्राकृतिक खेती केवल खेती की पद्धति नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य से जुड़ा एक व्यापक अभियान है। उन्होंने किसानों को जैविक उत्पादों के बढ़ते बाजार और संभावनाओं की भी जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को खेतों में प्राकृतिक खेती के व्यावहारिक प्रयोग, जैविक घोल निर्माण, फसल प्रबंधन तथा जल संवर्धन के विभिन्न मॉडल भी प्रदर्शित किए गए। किसानों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की। कार्यक्रम में उक्त अधिकारियों के अतिरिक्त साई ज्योति संस्था के श्री रमन शर्मा, श्री रमेश श्रीवास्तव, श्री राजेश सिंह, श्री मुकुल शर्मा, श्री वृषभान सिंह, श्री रामपाल सिंह, श्री सिंगराम सिंह, श्री अशोक तिवारी सहित बड़ी संख्या में किसान एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के समापन पर किसानों को प्राकृतिक खेती को अपनाने तथा अपने गांवों में इसके प्रचार-प्रसार का संकल्प दिलाया गया। खेती अपनाने के लिए आगे आना चाहिए।









