मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के बड़ागांव धसान सहित पूरे जैन समाज में शोक की लहर उस समय दौड़ गई, जब समाज के प्रतिष्ठित एवं धर्मनिष्ठ व्यक्तित्व सिंघई रतन चंद्र जैन दरगुवां वालों का समाधि मरण समता भाव के साथ संपन्न हो गया। उन्होंने आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री निर्दोष सागर जी महाराज, मुनि श्री निर्लोभ सागर जी महाराज एवं मुनि श्री निरुपम सागर जी महाराज के सानिध्य में शांतिपूर्वक देह त्याग किया।

धार्मिक वातावरण और मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई इस आध्यात्मिक प्रक्रिया को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं समाजजन उपस्थित रहे। जैन धर्म में संलेखना और समाधि मरण को अत्यंत पवित्र और आत्मकल्याणकारी माना जाता है। बताया गया कि सिंघई रतन चंद्र जैन लंबे समय से धर्म, समाज सेवा और जैन संस्कृति के प्रचार-प्रसार से जुड़े रहे।
सिंघई रतन चंद्र जैन दरगुवां वालों को समाज और नगर का अत्यंत सम्मानित व्यक्ति माना जाता था। विशेष रूप से कोटि पहाड़ पर विराजमान बड़े बाबा की प्रतिमा स्थापना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को समाज आज भी याद करता है। धार्मिक कार्यों में उनकी सक्रिय भागीदारी और समाज के प्रति समर्पण ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दिलाई थी।
उनके निधन की सूचना मिलते ही टीकमगढ़, बड़ागांव धसान, दरगुवां सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर फैल गई। समाजजनों ने इसे अपूरणीय क्षति बताया। आज सिद्ध क्षेत्र फलहोड़ी बड़ागांव में 🙏बिनयांजलि सभा का आयोजन किया जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
शोकाकुल परिवार में सिंघई शिखर चंद्र, देवेंद्र कुमार, जिनेंद्र कुमार एवं रमेश कुमार जैन सहित समस्त परिवारजन शामिल हैं। समाज के अनेक गणमान्य नागरिकों, धर्मावलंबियों एवं श्रद्धालुओं ने उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है।
आज हमारे समाज का एक सितारा अस्त हो गया है उनके लिए श्रद्धांजलि सदर नमन🙏( धरणेन्द्र सिंघई उमरिया कलेक्टर)
समाज की इतनी बड़ी क्षति को पूरा करना मुश्किल है रतन चंद जी ने समाज के लिए ऐसे काम किये है जिसको भूलना भी मुश्किल है (डॉक्टर कैलाश नूना अध्यक्ष सिद्ध क्षेत्र बड़ागांव धसान)








