*वैराग्य का स्वर्णिम प्रसंग: शिक्षिका मालती बाई जैन बनीं क्षुल्लिका 105 ‘संलेखना श्री’ माताजी*

टीकमगढ़ – जैन जगत के सूर्य, परम पूज्य आचार्य भगवान श्री 108 विभव सागर जी महाराज के असीम आशीर्वाद से जैन समाज में एक अभूतपूर्व, अलौकिक और वैराग्यमयी मंगल प्रसंग बेहद भव्यता के साथ संपन्न हुआ।

परम पूज्य 105 आर्यिका रत्न श्री ओम श्री माताजी की महती कृपा, पावन सानिध्य और छत्रछाया में, महावीर विहार स्थित श्री चंद्रप्रभु जिनालय में यह भव्य दीक्षा समारोह पूर्ण भक्तिभाव और अपार जनसमूह की उपस्थिति में आयोजित किया गया।

शिक्षिका पद का परित्याग कर अपनाया संयम का मार्ग

आर्यिका श्री ओम श्री माताजी के पावन एवं आदर्श चरित्र से अनुप्राणित होकर, मालथौन (दिगौड़ा) निवासी समाज की परम धर्मनिष्ठ श्राविका और पूर्व शिक्षिका श्रीमती मालती बाई जैन ने संसार की नश्वरता को पहचानते हुए ‘सल्लेखना पूर्वक’ दीक्षा धारण करने का सर्वोच्च आत्म-कल्याणकारी निर्णय लिया। आचार्य श्री के आशीर्वाद से उन्हें 105 क्षुल्लिका श्री ‘संलेखना श्री’ माताजी के रूप में नया संयमी जीवन प्राप्त हुआ है। वर्तमान में माताजी की सल्लेखना साधना अत्यंत दृढ़ता के साथ चल रही है।

“दीक्षा मात्र एक क्रिया नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन का परम पावन मार्ग है।”

अमन जैन सापोन,अनुराग जैन ने जानकारी देते हुये बताया की अलौकिक दीक्षा विधि: श्री चंद्रप्रभु जिनालय, महावीर विहार में गगनभेदी जयकारों, मंत्रोच्चार और ढोल-नगाड़ों के बीच दीक्षा की सभी मांगलिक क्रियाएं संपन्न हुईं।

‘इच्छामी’ के जयकारों से गूंजा पंडाल: नव-दीक्षित क्षुल्लिका 105 श्री संलेखना श्री माताजी को समस्त धर्मप्रेमी बंधुओं और सकल जैन समाज ने सामूहिक रूप से “इच्छामी, इच्छामी माताजी” कहते हुए वंदन किया और मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।

पुण्य की स्वर्णिम अनुमोदना: उपस्थित जनसमुदाय ने नव-दीक्षित माताजी के इस उत्कृष्ट वैराग्य, कठोर त्याग और उनके महान पुण्य की भूरि-भूरि अनुमोदना की। इस अलौकिक कार्य को समाज ने स्वर्णिम अक्षरों में लिखे जाने योग्य बताया।

कृतज्ञता एवं आभार

इस संपूर्ण भव्य आयोजन को सफल बनाने में समस्त जैन समाज की विभिन्न कमेटियों, प्रबुद्ध जनों और युवाओं का पूर्ण सहयोग एवं सानिध्य प्राप्त हुआ। समाज के सभी बंधुओं ने तत्परता से अपनी भूमिका निभाते हुए धर्म प्रभावना को बढ़ाया।

मंगल भावना

सकल दिगंबर जैन समाज इस भव्य जीव की उत्कृष्ट साधना और दृढ़ सल्लेखना की बारंबार अनुमोदना करता है। आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज एवं आर्यिका श्री ओम श्री माताजी के इस अनन्त उपकार के प्रति संपूर्ण समाज नतमस्तक है।

नव-दीक्षित क्षुल्लिका 105 संलेखना श्री माताजी के चरणों में त्रिवार इच्छामि इच्छामि इच्छामि

प्रेषक: सकल दिगंबर जैन समाज, समस्त कमेटियां एवं समस्त धर्मप्रेमी बंधु, महावीर विहार /टीकमगढ़ (म.प्र.)

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रामजी तिवारी मड़ावरा

चीफ एडिटर – स्वराज भास्कर

रामजी तिवारी मड़ावरा एक अनुभवी और निष्पक्ष पत्रकार हैं, जो उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश की जमीनी खबरों को सटीकता और विश्वसनीयता के साथ प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्षों के अनुभव के साथ, उनका उद्देश्य समाज तक सच्ची, निष्पक्ष और प्रभावशाली खबरें पहुंचाना है।

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