बड़ागांव धसान : जिंदगी भर शिक्षा, सेवा और संस्कारों की अलख जगाने वाले बड़ागांव धसान के शिक्षक एवं समाजसेवी अजयकांत जैन फ णीन्द्र ने अब मृत्यु के बाद भी समाज को नई दिशा देने का संकल्प लिया है। उन्होंने अपनी संपूर्ण देह मेडिकल छात्रों के शिक्षण के लिए दान करने का ऐतिहासिक निर्णय लेकर क्षेत्र में प्रेरणा की नई मिसाल कायम की है। उनके इस कदम की हर ओर सराहना हो रही है।

स्थानीय लोगों ने कहा कि अजयकांत फ णीन्द्र एक शिक्षक है और पिछले महीने अप्रेल में सेवानिवृत्त हो गए है। स्थानीय लोगों ने कहा कि केवल शिक्षक नहीं, बल्कि समाजसेवी, कवि, साहित्यकार, मंच संचालक, गायक और जनचिंतक के रूप में बहुमुखी प्रतिभा के धनी है। जिनका यह निर्णय आने वाली पीढिय़ों को प्रेरित करेगा। यह निर्णय केवल देहदान नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश है कि इंसान का जीवन तभी सार्थक है, जब वह अपने जाने के बाद भी मानवता के काम आए। पहल अब पूरे बुंदेलखंड के लिए प्रेरणा बनती दिख रही है।
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज को समर्पित होगी देह
धनुषधारी मंदिर के पास निवासी 62 वर्षीय अजयकांत जैन फ णीन्द्र ने बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय, सागर के अधिष्ठाता को विधिवत प्रपत्र भेजकर मृत्यु के बाद अपनी देह एनाटॉमी विभाग को सौंपने का निर्णय लिया है। इस पुनीत कार्य के लिए उन्होंने परिवार की सहमति भी प्राप्त की। उनकी धर्मपत्नी माया देवी जैन ने भी लिखित रूप से इस निर्णय का समर्थन किया।
देहदान केवल दान नहीं, चिकित्सा विज्ञान को जीवन का उपहार
सेवानिवृत्त शिक्षक अजयकांत फ णीन्द्र ने कहा कि रक्तदान, देहदान और सेवा से बड़ा कोई दान नहीं। जीवन में गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा करनी चाहिए और मृत्यु के बाद यदि शरीर विद्यार्थियों के ज्ञान और चिकित्सा विज्ञान के विकास में काम आए, तो इससे बड़ा सौभाग्य क्या हो सकता है।
शिक्षाए सेवा और संस्कार का पर्याय है फ णीन्द्र
अजयकांत फ णीन्द्र वर्षों से शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता अभियान, खेलकूद और धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे है। गरीब विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा, जरूरतमंदों की सहायता और कोरोना काल में राशन व भोजन पहुंचाने जैसे कार्यों ने उन्हें समाज में विशिष्ट पहचान दिलाई है।








