*आज दिन शुक्रवार ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी को जैन धर्म के सोलहवें तीर्थंकर १००८ श्री शांतिनाथ भगवान का जन्म,तप एवं मोक्ष कल्याणक श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर डबसन हावड़ा में बहुत ही धूमधाम एवं भक्तिभाव से मनाया इस अवसर पर मंदिर जी में शांतिनाथ विधान का भव्य आयोजन किया गया*

*इस शांतिनाथ विधान में सभी साधर्मी बंधुओं ने बड़ चढ़कर हिस्सा लिया सुबह से ही मंदिर जी में भक्तों की भारी भीड़ थी सभी भव्य जीव भगवान का अभिषेक-शांतिधारा एवं पूजन विधान कर निर्वाण लाडू चढ़ा रहे थे*
*शांतिनाथ भगवान हस्तिनापुर के राजा विश्वसेन और महारानी ऐरा (या अचला) के पुत्र थे वे एक चक्रवर्ती सम्राट भी थे। उन्होंने सम्मेद शिखरजी के कुंदप्रभ कूट से मोक्ष प्राप्त किया।शांतिनाथ भगवान की आयु: 1,00,000 (एक लाख) वर्ष की थीं एवं उन्होंने वर्षों तक चक्रवर्ती सम्राट के रूप में शासन किया। एक दिन दर्पण में दो प्रतिबिंब देखकर उन्हें संसार की अनित्यता का बोध हुआ और जाति स्मरण ज्ञान से वैराग्य हो गया*
*दीक्षा के बर्ष बाद नंदी वृक्ष के नीचे उन्हें केवलज्ञान प्राप्त हुआ उन्होंने हजारों वर्षों तक धर्म का प्रचार किया और अंत ने ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी के दिन शाश्वत सिद्ध क्षेत्र श्री सम्मेद शिखर जी निर्वाण प्राप्त किया*
*शांतिनाथ भगवान के जन्म,तप एवं मोक्ष कल्याणक के शुभ अवसर पर जैन मंदिरों में पूजा-अर्चना और विशेष आयोजन किए जाते हैं।भगवान शांतिनाथ ने विश्व को ‘शांति’ का संदेश दिया, और उनका मोक्ष कल्याणक आत्मिक शांति व निर्वाण का प्रतीक है।*
*सुशील पांड्या,सुरेश गंगवाल,भागचंद बड़जात्या,विनोद गंगवाल,शैलेश गंगवाल,विनीत जैन,राजेश अजमेरा,शांति गंगवाल,कनक पांड्या,शशि काशलीवाल आदि सभी साधर्मी बंधुओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया*
*इस भव्य शान्तिनाथ विधान में हावड़ा डबसन सहित आसपास के क्षेत्रों से अनेक श्रद्धालु व गणमान्य जन उपस्थित रहे।*








